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कल की छोड़ो, कल का क्या है

ऐसा मत सोचो कि जब सब सोचेंगे तब सोचेंगे
पहले हम सोचेंगे तब ही तो इक दिन सब सोचेंगे

आख़िर बंदूकों से ही जब सारे काम निकलने हैं
आयत रटने से क्या हासिल अहले-मक़तब सोचेंगे

दो और दो को पाँच बनाने की तरक़ीबें क्या होंगीं
इस उलझन का हल कुर्सी पर बैठे साहब सोचेंगे

आज जिन्हें मीठी लगती हैं, मेरी कड़वी बातें भी
कल वो मीठी बातों के भी कड़वे मतलब सोचेंगे

कल की चिन्ताओं पर अपना आज निछावर क्या करना
कल की छोड़ो, कल का क्या है, आएगा तब सोचेंगे

✍️ चिराग़ जैन

क़ुसूर

सज़ाओं में मैं रियायत का तलबदार नहीं
क़ुसूरवार हूँ कोई गुनाह्गार नहीं
मैं जानता हूँ कि मेरा क़ुसूर कितना है
मुझे किसी के फ़ैसले का इंतज़ार नहीं

✍️ चिराग़ जैन

आदमीयत का अंदाज़ा

हम मुहब्बत का अंदाज़ा करेंगे
वो हिमाक़त का अंदाज़ा करेंगे

जब तलक दूरियाँ न हों शामिल
कैसे चाहत का अंदाज़ा करेंगे

आदमी को समझ न पाए जो
क्या वो क़ुदरत का अंदाज़ा करेंगे

दौरे-ग़म में कहे कोई कुछ भी
सब नसीहत का अंदाज़ा करेंगे

आदमी ज़िब्ह करने वाले ही
आदमीयत का अंदाज़ा करेंगे

ख़ुद ही आफ़त बुलाएंगे और फिर
ख़ुद ही राहत का अंदाज़ा करेंगे

जब भी बेबाक़ सच कहेंगे हम
वो बग़ावत का अंदाज़ा करेंगे

हम तो अपना समझ के कह देंगे
सब तिज़ारत का अंदाज़ा करेंगे

लोग मेरी हरेक हरक़त से
मिरी फितरत का अंदाज़ा करेंगे

✍️ चिराग़ जैन

मुझे अहसास है

किसी पत्थर से जब तूने ये हाले-दिल कहा होगा
तेरी आँखों से बरबस दर्द का सागर बहा होगा
मेरे दिल ने भी पीड़ा को हज़ारों बार झेला है
मुझे अहसास है तूने वो ग़म कैसे सहा होगा

✍️ चिराग़ जैन

महावीर वंदना

महावीर स्वामी बनें तेरे अनुगामी; सारी
दुनिया के प्र्राणी नाथ ऐसा वर दीजिए
बंद हो समर बहे प्रेम-निर्झर; मिटे
चेहरों से डर कुछ ऐसा कर दीजिए
आसुरी प्र्रयास पर बाँसुरी विजयी बने
अधरों पे मीठी मुस्कान धर दीजिए
पाँच अणुव्रत, दश धर्मों की गूँज उठे
भारत को फिर से महान कर दीजिए

त्रिशला के लाल तेरा कैसा है कमाल; नहीं
तन पे रुमाल फिर भी तू महाराज है
जीत लिया काल, काट कर्मों का जाल; नोच
दिए सब बाल तेरे वीरता के काज हैं
तप का धमाल तेरे त्याग का धमाल; तेरी
सधी हुई चाल तेरा दुनिया पे राज है
धरती निहाल तो पे आसमां निहाल; सारी
जगती निहाल तू त्रिलोक सरताज है
✍️ चिराग़ जैन

दुश्मनों के सर

काली अमावस का अंधेरा होम करने को,
दीवाली के दीप सामधेनी बन जाएंगे
पीड़ा वाली ज्वालाएँ जहाँ प्रचण्ड होंगी, वहाँ
शांति-धार बरसाने प्रेम-घन जाएंगे
बलिदान हुए यदि कहीं तेरे लाडले तो
अरथी सजाने केसरी-सुमन जाएंगे
पर यदि तलवार चली रणबाँकुरों की,
शत्रुओं के शीश तेरी ही शरण आएंगे

चाहे कितने भी हथियार वे बटोर लाएँ,
लूट नहीं सकते हैं तेरी आन-बान माँ
बार-बार तूने घूँट कड़वे पिए हैं पर
अब नहीं करना पड़ेगा विषपान माँ
ऑंख भी उठाई यदि पापियों ने तेरी ओर,
कम पड़ जाएंगे कफ़न वाले थान माँ
दुष्ट असुरों का सर्वनाश करने के लिए
परमाणु-बमों का करेंगे संधान माँ

लाज तेरे पावन किरीट की बचाने हेतु
कर में किरिच औ त्रिशूल धर लेंगे हम
चामरों की सौम्य पवन का जिन्हें ज्ञान नहीं,
उन्हें समझाने को प्रलय-समर देंगे हम
अब नहीं तृषित रहेगी देवी रणचंडी,
शत्रुओं के श्रोणित से घट भर देंगे हम
सुमनों की क्या बिसात; माता भेंट में तू आज
मांग के तो देख दुश्मनों के सर देंगे हम

✍️ चिराग़ जैन

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