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वसीयत

वो दौर गये जब लोग वसीयतों में ज़मीन-जायदाद छोड़कर जाते थे, आजकल तो चार सोशल मीडिया अकाउंट्स, कुछ हज़ार फॉलोवर्स और दस-पाँच ब्लॉक्ड प्रोफाइल्स से ज़्यादा किसी के पास कुछ नहीं है छोड़ने को…

सफेद बाल और अरथी देखकर वैराग्य घटित होनेवाली कहानियां सुनकर बड़े हुए थे, पर अब पता चला कि व्हाट्सएप-इंस्टाग्राम थोड़ी देर को बन्द हो जाए तो जीवन निरर्थक लगने लगता है।

✍️ चिराग़ जैन

सीधी सी बात

जो बड़ा होता है, उसे बताना नहीं पड़ता
जिसे बताना पड़ता है, वो बड़ा नहीं होता

जो अपना होता है, उसे सफ़ाई नहीं देनी पड़ती
जिसे सफाई देनी पड़े, वो अपना नहीं होता

✍️ चिराग़ जैन

सफ़र

आगे बढ़नेवाला हर पैर अपने ही दूसरे पैर को पीछे छोड़ता है। अगर पीछेवाला पैर स्वयं आगे आने की बजाय दूसरे पैर की निंदा में लग जाएगा तो सफ़र वहीं रुक जाएगा।

✍️ चिराग़ जैन

विविधता में एकता

भारत एक ऐसा उपवन है जहाँ अलग-अलग रंग के फूल खिलते हैं। हमें उन व्यापारियों की कोई ज़रूरत नहीं है, जो फूलों को डालियों से अलग करके बाज़ार में बेच दें। हमें तो वह माली चाहिए जो अलग-अलग रंग के फूलों को करीने से लगाकर बगीचे की सुंदरता बढ़ा सके।

हमें ऐसे बहुत सारे चैनल नहीं चाहियें जो समाज में परस्पर द्वेष की भावना भरकर आग भड़काएँ, हमारे लिए वह एक चैनल पर्याप्त है जो प्यार और भाईचारे का संदेश देकर देश को मिल-जुलकर रहना सिखाए

✍️ चिराग़ जैन

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