Article, Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose
दुनिया की समस्या ये है कि विश्व से आतंकवाद कैसे समाप्त हो। फ़्रांस इस सोच में व्यस्त है कि isis को कैसे समाप्त किया जाए। अमरीका ये सोच रहा है कि हमला ज़मीनी होना चाहिए या हवाई। चीन इस चिंता में है कि विश्व की अर्थव्यवस्था को अपने पक्ष में कैसे पलटा जाए। पाकिस्तान यह जुगत भिड़ा रहा है कि चीन और अमरीका दोनों से मित्रता कैसे बनाई रखी जाए। ऐसे में हमारे प्रश्न ये हैं कि हमें शाहरुख और आमिर की फ़िल्म देखनी चाहिए या नहीं। हमारी चिंता ये है कि मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर काटे गए केक में कितना ख़र्चा हुआ। हम इस मुद्दे पर उलझे हैं कि रामदेव की मैगी नेस्टले की मैगी से बेहतर है या नहीं।
न्यूज़ का इंटरनेशनल बुलेटिन देख कर समझ आता है कि ‘इनक्रेडिबल इण्डिया’ का मतलब क्या है।
जब आमिर खान अतुल्य भारत के विज्ञापन कर रहे थे तो ऐसा लगता था जैसे भोला-भाला पीके दाढ़ी बनाते नाई की तशरीफ़ में घुसा पायजामा निकाल रहे हों। और असहिष्णुता वाला बयान देकर उन्होंने वो पायजामा वापस वहीँ घुसा दिया।
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose
उत्सवों के मौसम में पेरिस की आबो-हवा आतंकी हमलों से विषैली हो गई। शुक्रवार की शाम वीकेंड की शुरुआत थी। सैंकड़ों बेगुनाह दहशतगर्दी के शिकार हुए।
आख़िर कब पूरी दुनिया एकजुट होकर इन मुट्ठी भर जाहिलों को क़ाबू करेगी। हम कब अपनी जातियों, सम्प्रदायों. भूगोलों, देशों, भाषाओँ से ऊपर उठकर मानवता के लिए एक होंगे।
जब किसी की मृत्यु की ख़बर आती है तो एक क्षण के लिए जीवन की आपाधापी व्यर्थ लगने लगती है। इसी तरह जब कहीं किसी आतंकवादी घटना का ज़िक्र आता है तो ये पुरस्कार वापसी, ये राज्यसभा का गणित, ये टीपू सुल्तान विवाद … सब अनर्गल जान पड़ते हैं।
एक बार इंसान होकर सोचें तो शायद इंसानियत के इन दुश्मनों को समाप्त किया जा सके।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose, Story
मोदी जी नेपाल गए। लोगों ने नारे लगाए -“मोदी …मोदी।” मोदी जी प्रसन्न हुए। मोदी जी अमरीका गए। लोगों ने नारे लगाए- “मोदी …मोदी।” मोदी जी आत्मविश्वासी हो गए। मोदी जी जापान गए। लोगों ने नारे लगाए- “मोदी ..मोदी।” मोदी जी बेबाक़ हो गए। मोदी जी चीन गए। लोगों ने नारे लगाए- “मोदी ….मोदी।” मोदी जी ने विपक्षियों की बातें सुननी बंद कर दीं। मोदी जी जर्मनी गए। लोगों ने नारे लगाए- “मोदी …मोदी। मोदी जी ने सबकी बात सुननी बंद कर दी।
मोदी जी कश्मीर में परास्त हुए। लेकिन कानों में गूँजता रहा- “मोदी …मोदी।” मोदी जी दिल्ली हार गए। लेकिन कानों में गूँजता रहा- “मोदी …मोदी। मोदी जी बिहार में हारे तो भ्रम टूटा। चेहरा उतर गया। कान सुन्न हो गए। उनको आडवाणी जी की आवाज़ सुनाई दी। जोशी जी की बात पर उनका ध्यान गया। लेकिन आज मोदी जी ब्रिटेन पहुँच गए। लोगों ने फिर नारे लगाए- “मोदी… मोदी।” तभी मोबाईल पर किसी हितचिंतक ने फोन करके कहा- “भारत में आपकी लोकप्रियता कम हुई है।” मोदी जी ने ज़ोरदार अट्टहास किया। मोबाइल को हिक़ारत से स्विच ऑफ़ किया। और हाथ हिलाते हुए उनका अभिवादन करने लगे जो नारे लगा रहे थे- “मोदी …मोदी।”
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose
सियासत के एक खेमे ने कुछ कलाकारों को बटोरा …सरकार का विरोध करने के लिए।
फिर सियासत के दूसरे खेमे ने कुछ कलाकारों को बटोरा …कलाकारों का विरोध करने के लिए।
अब कुछ दिन हो-हल्ला होगा।
एक खेमे के कलाकार दूसरे खेमे के कलाकारों को गालियाँ देंगे। खूब शोर होगा। सोशल मीडिया पर खेमेबाज़ी होगी। जब माहौल खूब बिगड़ लेगा तो एक दिन टीवी चैनल पर दो बड़े दलों के राजनेता दुखी होते हुए बयान देंगे – “हमें बहुत दुःख है कि साहित्य और कला के क्षेत्र से जुड़े लोग आपस में इस तरह लड़ते-मरते हैं। अरे भाई! तुम कलाकार हो, सृजन करो, कविता लिखो, मनोरंजनकरो। राजनीति करना आपको शोभा नहीं देता।”
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose
बधाई हो!
दिल्ली सरकार का ‘स्वराज पर्व’ रद्द हो गया। मतलब यह कि केन्द्र सरकार स्वतंत्रता दिवस मनाएगी, और सारी सरकारें भी स्वतंत्रता दिवस मनाएंगी, लेकिन दिल्ली सरकार स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाएगी। अख़बार में आया है।
पहली बार पता चला है कि स्वतंत्रता दिवस भी सबका अलग-अलग है। सुना है कि दिल्ली पुलिस ने “दिल्ली सरकार के स्वतंत्रता दिवस” पर सुरक्षा मुहैया करने से इनक़ार कर दिया है, कारण यह कि वह केन्द्र सरकार के स्वतंत्रता दिवस को सुरक्षित रखने में व्यस्त रहेगी।
दिल्ली सरकार के मंत्री ने और भी आगे की बात कही है। उनका बयान आया है कि मौसम की भविष्यवाणी को देखते हुए स्वराज पर्व रद्द किया गया है। ये बात तार्किक लगती है। दरअस्ल 15 अगस्त इस बार पहली बार 15 अगस्त के दिन पड़ रहा है। यह भी पहली बार है कि अगस्त के महीने में बरसात हो रही है। लेकिन केन्द्र सरकार के मौसम विभाग को ऐसी बातों की कोई परवाह नहीं है। वह जानता है कि बादल और वर्षा दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर लालक़िले की प्राचीर तक आ भी गए तो माननीय प्रधानमंत्री जी उन दोनों को अपनी लच्छेदार भाषा और रोचक शैली में उलझा लेंगे और बरसने का मौक़ा ही नहीं देंगे। लेकिन दिल्ली सरकार के आयोजनों में ऐसी क्षमता का सर्वथा अभाव है।
दशकों से चले आ रहे “स्वतंत्रता दिवस कवि-सम्मेलन” को भी इसी रद्दीकरण की टोकरी में पटक दिया गया है। इत्तिफ़ाक़न अगले वर्ष गणतंत्र दिवस कवि-सम्मेलन भी गणतंत्र दिवस के ही अवसर पर आयोजित होना है। उस समय भी पुलिस केन्द्र सरकार के गणतंत्र दिवस की सुरक्षा में व्यस्त रहेगी और नेहरू जी के समय से चला आ रहा गणतंत्र दिवस कवि सम्मेलन “दिल्ली सरकार के गणतंत्र दिवस” का हिस्सा होने की वजह से रद्द कर दिया जायेगा। उस समय दिल्ली सरकार के मंत्री भयंकर ठंड का पूर्वानुमान देखते हुए ऐसा निर्णय ले लेंगे।
मोदी जी की किताब का लोकार्पण बारिश से प्रभावित नहीं हुआ; बिहार की चुनावी सभाओं पर मौसम ने कोई कुठाराघात नहीं किया; संसद के बाहर प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस को सुरक्षा मुहैया कराने में दिल्ली पुलिस को कोई कष्ट नहीं हुआ। लेकिन दिल्ली की जनता को आज़ादी का पर्व मनाने के लिये संकट खड़ा हो गया।
आतंक की इस देश में यह पहली जीत है। अब तक धमाकों के बावजूद हमने आतंकियों की दहशत को कोई प्रमाण-पत्र नहीं दिया था। इस बार विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी “केजरीवाल बनाम जंग” की जंग में आतंकियों की आड़ में छिपकर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के पौरुष की शहादत पर तीन दिन का मौन रखेगी और “दिल्ली सरकार के स्वतंत्रता दिवस” को विफल करने की ख़ुशी में नज़ीब जंग आतंकवाद को शौर्य पुरस्कार से नवाज़ेंगे।
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose
इस देश के सभी लोग चाहते हैं कि हम लोग अपने त्योहार मिलजुलकर मनाएं। अच्छी बात है। मनाने भी चाहियें। लेकिन जब वे ही सब लोग किसी चुनौती से जूझते हैं तो हम साथ खड़े क्यों नहीं दिखाई देते। जब हमारा लचर न्यायतंत्र दशकों की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद किसी कठोर निर्णय पर पहुँचता है तो हम हिन्दू-मुस्लिम हो जाते हैं। जब आप फ़िल्म बनाते हैं तो भेदभाव भूल कर उसमें क़ौमी एकता का मसाला फिट करके हिंदुओं से भी कमाते हैं और मुस्लिमों से भी। लेकिन आधी रात को दारू पी कर जब आप ट्विटर लॉगिन करते हैं तो आपको याद आ जाता है कि इस देश में आपके रहते एक मुस्लिम को फाँसी की सज़ा कैसे सुनाई जा सकती है।
आप नवाज़ शरीफ से दरख्वास्त करते हैं कि प्लीज़ टाइगर को हमें दे दो। हमारा देश बहुत ठाली है। मेमन की फांसी के बाद हमारे पास बावेला उठाने को कोई मुद्दा नहीं बचेगा। हमारे धार्मिक संगठन निकम्मे हो जाएंगे। हमारी अदालतें खंडहर बन जाएंगी। हमारे बुद्धिजीवी बेरोज़गार हो जाएंगे। हमारा देश आप ही के रहमो करम पर है। इसलिए “प्लीज़” टाइगर हमें दे दीजिये।
….शर्म आनी चाहिए। जिस पाकिस्तान के लोगों की इमेज डैमेज का काम आपने अपनी महान फ़िल्म “बजरंगी भाईजान” से किया है उसी की दी हुई बोटियाँ आपके ट्वीट्स में लार टपकाती नज़र आ रही हैं। हमने कभी आपको पराया नहीं समझा। जब अदालत ने आपको बेल दी तो इस देश के हज़ारों लोग लपककर आपको बधाई देने पहुंचे थे। इन्हीं लोगों को मौत के घाट उतारनेवाले (चाहे वो हिन्दू हों या मुस्लिम) को आप सपोर्ट कर रहे हैं।
आपकी उँगलियाँ नहीं कांपी। आपके ज़मीर ने कोई करवट न ली। आपके दिल से कोई आवाज़ न आई। जिन लोगों ने आपको सर-माथे पर बैठाया उन लोगों के हत्यारों के समर्थन में खड़े होने से आपकी टांगों ने इनकार न किया।
आपकी फिल्मों में कोई स्टोरी हो या न हो; आपकी हरकतों में कोई अभिनय हो या न हो; आपके नृत्य में कोई लरजिश हो या न हो…. केवल आपकी सूरत देखने भर को ये जनता अपनी जेब से सौ-सौ करोड़ रूपये लुटा देती है। और कितनी दौलत चाहिए आपकी हवस को।
सॉरी टू से मिस्टर खान, यू आर सच ए थैंकलेस पर्सन।
✍️ चिराग़ जैन