फ़ुरसत
धूप इक रोज़ ढल ही जाती है
उम्र सूरत बदल ही जाती है
थोड़ी फ़ुरसत निकालकर देखो
ज़िन्दगी तो निकल ही जाती है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
धूप इक रोज़ ढल ही जाती है
उम्र सूरत बदल ही जाती है
थोड़ी फ़ुरसत निकालकर देखो
ज़िन्दगी तो निकल ही जाती है
✍️ चिराग़ जैन
संपर्क करें