+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

विवेक को सोने दो

चेतावनी: यह पोस्ट आपको विवेकशील बना सकती है। और विवेकशील होना आपके राजनैतिक भविष्य के लिए घातक है।

हम भयंकर संवेदनहीन लोगों से घिर चुके हैं।
‘अपराधी’; ‘विवश’; ‘दरिन्दा’ और ‘बेचारा’ जैसे उपनाम हमारी राजनैतिक प्रतिबद्धता को देखकर तय किए जाते हैं।
भाजपाई होने के लिए मुसलमानों से घृणा न्यूनतम अर्हता है, और कांग्रेसी होने के लिए संघ से नफ़रत ज़रूरी है।
कांग्रेसी होकर कांग्रेस की चूक पर बोलना पाप है। भाजपाई होकर भाजपा सरकार की किसी भी नीति का विरोध महापाप है।
मोदी जी की मिमिक्री करने पर किसी को प्रताड़ित किया जाएगा तो कांग्रेसी और आपिये भाजपा को हास्यबोध विहीन घोषित कर देंगे। लेकिन किसी ने राहुल गांधी या केजरीवाल पर कोई परिहास कर दिया तो यही कांग्रेसी और आपिये उससे परहेज करने लगेंगे।
निष्पक्ष होना कदाचार कहलाने लगा है। विवेकशील लोग राजनीति के लिए ख़तरनाक़ हैं। असहमति जतानेवाला एक दिन ग़लत को ग़लत कह देगा, इसलिए किसी को सदस्य चाहियें ही नहीं। सबको अंधभक्त चाहियें।
अपना विपक्ष किसी को भी बर्दाश्त नहीं है। हर दल वहाँ लोकतन्त्र लाना चाहता है, जहाँ वह सत्ता में नहीं है। सत्ता में आते ही सब तानाशाही के पक्ष में तर्क जुटाने लगते हैं।
विपक्ष में रहकर जो मशालें उठाई जाती हैं, सत्ता में पहुँचते ही उन मशालों को आरती का थाल बनाकर चमचों के हाथ में थमा दिया जाता है।
बलात्कार यदि कांग्रेस शासित राज्य में हुआ है तो कांग्रेस का समर्थक, वहाँ शासन की कार्रवाई से संतुष्ट होगा। ज़्यादा गहरा समर्थक हुआ तो पीड़िता की ग़लतियाँ भी ढूंढ सकता है। छोटा-मोटा समर्थक हुआ तो भी कम से कम चुप लगाने जितनी निष्ठा तो निभाएगा ही। लेकिन यही दुष्कर्म यदि भाजपा शासित राज्य में होगा तो कांग्रेस का कार्यकर्ता सबसे पहले सरकार को अमानवीय घोषित करेगा, फिर मनुष्यता का झंडा उठाएगा, बेटियों के पक्ष में संवेदनात्मक पोस्ट्स लिखेगा।
मणिपुर में महिला को नंगा घुमाया जाएगा तो भाजपावाले उस वीडियो से दहल नहीं जाएंगे। वे उसके वायरल होने के पीछे सरकार को बदनाम करने की मंशा तलाश लेंगे। मणिपुर में होनेवाली विदेशी फंडिंग की काल्पनिक रसीदें दिखाकर मणिपुर के लोगों को राष्ट्रद्रोही साबित करेंगे।
लोकतंत्र और नैतिकता, नंगे बदन, सिर झुकाए, सड़क पर पत्थर खाएगी और राजनीति उसके अंगोपांग को मसलकर अपने बलशाली होने का जश्न मनाती रहेगी।
जनता का विवेक कुंभकर्ण की नींद सो रहा है। राजनैतिक रावण मनुष्यता की लक्ष्मण रेखा लाँघकर भी जन-संवेदना की सीता को अपनी अशोक वाटिका में कैद रखना चाहते हैं।
अपने विवेक को आँखें मत खोलने देना, क्योंकि आँखें खोलते ही उसे अपने राजनैतिक आका के चेहरे पर लगे घिनौने धब्बे साफ़-साफ़ दिखने लगेंगे।

✍️ चिराग़ जैन

विनीत चौहान

सामाजिक व्यवहार में मैच्योरिटी की परिभाषा तलाशता हूँ तो पाता हूँ कि सही और ग़लत का निर्धारण करने से पहले अपने व्यक्तिगत लाभ और हानि का आकलन करने की क्षमता को मैच्योरिटी कहते हैं। यद्यपि यह परिभाषा मैंने स्वयं गढ़ी है, तथापि मैच्योर कहे जानेवाले अधिकतम लोगों को मैंने इस परिभाषा पर खरा उतरते देखा है। मेरा निजी मत यह है कि इस परिभाषा की परवाह न करते हुए सहज आचरण करनेवाले लोग अधिक निश्छल, अधिक प्यारे और अधिक जेनुइन होते हैं। सामान्य भाषा में इनके लिए एक विशेष शब्द प्रयुक्त किया जाता है जो ‘मूर्ख’ शब्द का निकटतम पर्यायवाची है।
मुझे ऐसे तथाकथित मूर्ख अधिक नैतिक और अधिक निस्पृह लगते हैं। मैं अपने ख़ुद के आचरण में इस ‘मूर्खता’ को कई बार आसानी से खोज लेता हूँ। यह सत्य है कि एमैच्योरिटी सामाजिक दृष्टि से असफलता की ओर ले जाती दिखाई देती है लेकिन मुझे ऐसे लोग तथाकथित ‘मैच्योर’ लोगों से अधिक बहादुर लगते हैं।
ऐसे ही एक एमैच्योर व्यक्ति हैं श्री विनीत चौहान। किसी भी घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया के साथ तैयार। लाभ-हानि का गणित लगाने का अवसर ख़ुद को ही नहीं देते। लड़ते हैं तो पूरी ऊर्जा से, क्योंकि जिस बात के लिए लड़ रहे होते हैं उसको अपने अन्तःकरण से ‘सच’ मान चुके होते हैं। जिसे अपना कह देते हैं, वह यदि उनसे छल भी कर रहा हो तो उसका छल बहुत देर में देख पाते हैं, क्योंकि अपने पूरे अन्तःकरण से उसे अपना मान चुके होते हैं। भावुक इतने कि संवेदना की किसी पंक्ति के पूरा होने से पहले ही आँखों में आँसू डबडबाने लगते हैं। मैंने अनेक अवसरों पर किसी पुरानी याद का संस्मरण सुनाते-सुनाते उनका गला रुंधते देखा है।
आज इस पारदर्शी व्यक्तित्व का जन्मदिन है। हिंदी कवि-सम्मेलन जगत् में मैच्योर लोगों की भीड़ के बीच जिन चंद किरदारों की संगत से मन खिल उठता है, उनमें विनीत जी एक हैं। विनीत जी अलवर से हैं और अलवर मेरी ननिहाल है, इस रिश्ते से मैं उन्हें ‘मामा’ कहकर संबोधित करता हूँ। मामा को ज्यों-ज्यों करीब से देखा, त्यों-त्यों समझ आया कि ‘हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी’ का अर्थ सकारात्मक भी हो सकता है। कितने ही किस्से हैं, जहाँ मामा का व्यक्तित्व अपने ही किसी पुराने व्यवहार के ठीक विपरीत दिखाई देने लगा।
किसी की पीड़ा पर बिलख पड़नेवाला शख़्स जब दुर्घटना में क्षत-विक्षत कविमित्रों को गाड़ी से बाहर निकालने के लिए गाड़ी के शीशे तोड़ता है तो उसके वज्रहृदयी होने के प्रमाण मिलते हैं। किसी की अनैतिकता पर क्रुद्ध हो जानेवाले विनीत चौहान जब किसी की विवशता का विश्लेषण करते हैं तो ऐसा लगता है ज्यों कोई करुण रस का कवि संवेदना की परतों को स्पर्श करना चाह रहा हो। जिनका मन भर आदर करते हैं, उनको भी यदि कहीं ग़लत पाते हैं तो उनसे जी भर कर लड़ लेते हैं।
विनीत चौहान का स्वभाव एक ऐसे संवेदनशील मनुष्य का उदाहरण है, जो मैच्योर सहगामियों के साथ रहकर भी अपनी निस्पृह प्रतिक्रियाओं को मैच्योर बनाने की न तो कभी इच्छा पाल सका, न ही ऐसी कोई आवश्यकता महसूस कर सका।
दोस्ती कैसे निभाई जाती है और दोस्त को साधिकार कैसे टोका जाता है, इस बात को समझना हो तो विनीत चौहान के अपनत्व के दायरे में प्रवेश करके देखिए!
✍️ चिराग़ जैन

मध्यम वर्ग की पीड़ा

तुम लड़ते रहे चुनाव, ओ साब
मेरी थाली खाली है रही है

मुझसे टैक्स वसूला जाए, उन्हें चढ़ावा जाए
मैं देकर भी झिड़की खाऊँ, वो खाकर गुर्राए
वो मुझे दिखावें ताव, ओ साब
मेरी जेब मवाली है रही है

मध्यम वर्ग बनाकर मुझको, दोनों ओर निचोड़ा
इन्हें दान दो, उन्हें मान दो, नहीं कहीं का छोड़ा
मेरा बढ़ता रहा अभाव, ओ साब
वहाँ रोज़ दीवाली है रही है

जीएसटी ने पहले सों ही इनकम कम कर राखी
रोड टैक्स देकर भी ससुरा टोल रह गया बाकी
मेरा कैसे होय बचाव, ओ साब
हर दिन बदहाली है रही है।

✍️ चिराग़ जैन

बजट 2024

मैंने सरकार से पूछा
जब एक लाख सालाना आय वाले
पैसे मांगने आए
तो आप क्या कर लेंगे
सरकार बोली करना क्या है
हम उन्हें जॉब देने वालों को
न्यूनतम वेतन कानून उल्लंघन का
चार्ज लगाकर धर लेंगे

हमने पूछा
ये इंटर्नशिप की योजना में तो काफी लोचा है
क्या आपने सोचा है
लोग नकली इंटर्नशिप दिखाकर
पाँच हज़ार रुपये महीने का दावा करेंगे सरकार से
सरकार ने हमें समझाया प्यार से
देखो इस स्कीम में सबकी भलाई है
इसमें बेरोज़गारों के हिस्से छाछ
और उद्योगपतियों के हिस्से मलाई है
उद्योगपति नई भर्ती इंटर्नशिप के नाम पर भरेगा
और 5000 रुपये महीना
अपने CSR FUND से भरेगा
नया रंगरूट 5000 रुपये कमाकर लाएगा
और ख़ुद को बेरोजगार भी नहीं कह पाएगा
तो हुई ना बात सबके अधिकार की
CSR उद्योगपति का
Job उद्योगपति की
और वाहवाही सरकार की

लेकिन जनाब
इससे पुराने employee की हालत हो जाएगी ख़राब
सरकार बोली
हमने नए रोज़गार देने का वादा किया था
पुराने रोयेंगे तो उन्हें भी देख लेंगे
अगले बजट में नयों की पट्टी खोलकर
पुरानों पर लपेट देंगे।

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!