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धरती के गहने हैं पेड़

रंग-बिरंगे पत्तोंवाले धरती के गहने हैं पेड़ मिट्टी के मटमैले तन पर पृथ्वी ने पहने हैं पेड़ क्यारी में ये फूल खिलाते ठण्डी-ठण्डी हवा चलाते धूप चुभे तो छाया लाते बारिश में छतरी बन जाते कभी फलों से लदती डाली कभी फूल लाते ख़ुशहाली साँस सुहाती गंध निराली आँखों को भाती हरियाली...

स्वार्थी कायरता

हम सब बहुत तेज़ी से भीड़ में अकेले होते जा रहे हैं। एक सिंह सैंकड़ों हिरणों के बीच से एक हिरण को उठा लाता है, क्योंकि सिंह आश्वस्त होता है कि आक्रमण के समय झुण्ड का प्रत्येक हिरण एकाकी हो जाएगा। यदि झुण्ड के आठ-दस हिरण भी संगठित होकर सिंह पर धावा बोल दें तो कोई नाहर...

ऊर्जा का सदुपयोग

जिस समय नल और नील समुद्र की लहरों को बांधकर सेतुनिर्माण कर रहे थे, उस समय रावण “भालू-बन्दरों की भीड़” कहकर रामदल का उपहास कर रहा था। यदि नल-नील ने उस उपहास का उत्तर देने में ऊर्जा निवेश की होती तो राम की सेना कभी सागर पार नहीं कर पाती। ✍️ चिराग़...
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