+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

रंग में भंग

होली के हुड़दंग में रंग में भंग पड़ गयी इधर ठण्डाई गले से नीचे उतरी उधर भांग सिर पर चढ़ गई भोले की बूटी ने ऐसा झुमाया कि हाथ को लात और सिर को पैर समझ बैठा चूहा भी ख़ुद को शेर समझ बैठा नशे की झोंक में लफड़ा बड़ा हो गया पत्नी के सामने तनकर खड़ा हो गया पत्नी ने आँखें दिखाई तो...

चुनाव के बाद

जीत और हार के शोर-शराबे के बाद यकायक राजनैतिक गलियारों में सन्नाटा पसर गया है। जीतनेवाले इतने स्पष्ट बहुमत से जीते हैं कि मीडिया के पोस्ट इलेक्शन अलायंस और हॉर्स ट्रेडिंग जैसे कैप्सूल धरे के धरे रह गये हैं। यही स्पष्ट बहुमत वर्तमान लोकतंत्र की दरकार है।...

बिटिया की विदाई

चल पड़ी ससुराल बिटिया सज-सँवर के मन बिलखकर रह गया इस पल अचानक देहरी की आँख नम होने लगी है मौन रहने लग गयी साँकल अचानक याद आता है अभी कल ही हमारी गोद में इक पाँखुरी सी आई थी तुम बस अभी कल ही कोई साड़ी पहनकर देखकर दर्पण बहुत इतराई थी तुम लांघकर बचपन, हुई थी तुम सयानी याद...

गोल-गोल गप्पा

पानी के बतासे, पुचका, गुपचुप, टिकिया और न जाने क्या-क्या नाम हैं इस चटखारे का। हर गली-नुक्कड़ पर कोई चाट का ठेला इस अनोखे व्यंजन के बिना पूरा नहीं होता। सूजी और आटे की छोटी-छोटी करारी पूरियों को फोड़कर उनमें आलू-चने और सोंठ का मसाला भरकर जब तक गोलगप्पे वाला उसे किसी...

कविता की नयी पौध

मुझे प्यार करनेवालों का कहना है कि मैं बहुत अच्छा लिखता हूँ। सुनकर अच्छा लगता है। मेरे अपनों का मानना है कि मैं सबसे अच्छा लिखता हूँ। सुनकर आश्वस्ति होती है कि मेरे पास मुझे ‘अपना’ माननेवाले ख़ूब लोग हैं। मेरे पाठकों का कहना है कि मुझ जैसा कोई नहीं लिख सकता। सुनकर एक...
error: Content is protected !!