भले ही कभी
बाँहों में भरकर
दुलारा न हो मुझे
आपके नेह ने!
…लेकिन फिर भी
न जाने क्यों
काटने को दौड़ता है
आपका मौन!
✍️ चिराग़ जैन
भले ही कभी
बाँहों में भरकर
दुलारा न हो मुझे
आपके नेह ने!
…लेकिन फिर भी
न जाने क्यों
काटने को दौड़ता है
आपका मौन!
✍️ चिराग़ जैन
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