Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
सरे-बज़्म मैं रुसवा हुआ, यही दौर का दस्तूर था
मैं ये बाज़ियाँ न समझ सका, मिरी सादगी का क़ुसूर था
तूने ग़म में ख़ुशियाँ तबाह कीं, मैंने हँस के दर्द भुला दिये
ये तो अपना-अपना रिवाज़ था, ये तो अपना-अपना शऊर था
तुझे जिस्म से ही गरज़ रही, मिरा जिस्म तेरी हदों में था
मिरी रूह मुझमें बची नहीं, तुझे कुर्बतों का फ़ितूर था
न सफ़र में मुझको मिला कोई, न डगर पे मुझको दिखा कोई
मुझे फिर भी इतना यक़ीन है, मेरे साथ कोई ज़रूर था
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
मैं अब जिन दोगलों के बीच रहकर ख़ूब रोता हूँ
मैं उनसे देर तक लम्बी ज़िरहकर ख़ूब रोता हूँ
मेरी मासूमियत तो बहुत पहले मर चुकी लेकिन
मैं सच बतलाऊँ अब भी झूठ कहकर ख़ूब रोता हूँ
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
चलो किसी तरह मैं मुश्क़िले-सफ़र से बचा
ख़ुदा मुझे तू अब गुमान के असर से बचा
इन आइनों के सामने से ज़रा बच के निकल
तू अपने आप को ख़ुद अपनी भी नज़र से बचा
अगर इस आग को बढ़ने से रोकना चाहे
तो अपने मुल्क़ को इस आग की ख़बर से बचा
ये दुनिया हर किसी पे उंगलियाँ उठाती है
तू अपनी सोच को रुसवाइयों के डर से बचा
बनावटें तिरे सच को भी झूठ कर देंगी
अगर वो सच है तो उसको अगर-मगर से बचा
दिलों की बात कहाँ, दुनिया की बिसात कहाँ
तू नज्मे-दिल को ज़माने की हर बहर से बचा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
सितम का दर्द होता है बहुत गहरा नहीं छिपता
मेरी नज़रों से आँसू का कोई क़तरा नहीं छिपता
किसी के होंठ कितनी भी अदाकारी करें लेकिन
बनावट से हक़ीकत का कभी चेहरा नहीं छिपता
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
किसी भी चोट को सहना बड़ा दुश्वार होता है
जु़बां हो और चुप रहना बड़ा दुश्वार होता है
ये माना दर्द को अभिव्यक्त करना भी ज़रूरी है
मगर जो है वही कहना बड़ा दुश्वार होता है
✍️ चिराग़ जैन