Blank Verse, Chirag Jain Writings, Poetry, Unpublished
फेसबुक पर छा गए लिक्खाड़
लिखते हैं दनादन
हर किसी मुद्दे पे इनकी राय है तैयार
बहुत बेख़ौफ़ लिखते हैं
इन्हें लिखे हुए शब्दों की ताक़त का
कोई आभास तो हो
इन्हें मालूम हो
इनकी बिना सोची हुई हर बात
पल भर में
किसी की साख पर बट्टा लगाती है
हवस-सी हो गई है
सबसे पहले
अपनी एफबी वॉल पर
सबसे ज़ियादा लाइक पाने की
इन्हें मालूम है सब कुछ
विदेशी ताक़तों ने
किस तरह बाज़ार को शैदा किया है
और ये भी इल्म है
कौन किसने कब कहाँ
किस गाँव में पैदा किया है
कौन कब मर जाएगा
कैसे मरेगा
कौन से ट्रक में लदेंगी गाय
कब हिन्दू डरेगा
कोई तो हो, जो इन्हें ये सब
बयां करने से पहले
दो घड़ी को ही
मगर कुछ सोच लेने की
हिदायत दे
ये नहीं कर पाए तो
ये काम कर दे
जब नए युग के ये सारे वर्चुअल भगवान
अपनी वॉल पर
ज़िंदा यूसुफ़ खानों के मरने की
नई तहरीर लिख दें
तो उसे पढ़ कर
युसुफ जी
ख़ुद-ब-ख़ुद उस बात को
सच में बदल डालें
ये नहीं समझेंगे
जब ये लोग
लोहू से रची ग़ज़लेँ चुराकर
पोस्ट करते हैं
तो उन ग़ज़लों पे मिलने वाली हर तारीफ़
उस शाइर के हक़ को
छीन लेती हैं
किसी कविता को
उसके रचयिता के नाम से
महरुम करना
किसी बच्चे को बिन कारण
यतीमी के जहन्नुम में
पटक देने के जैसा है।
इन्हें कोई ज़रा समझाए
चाकू सिर्फ़ इक औजार है
बस सृजन जिसका काम है
इसे हथियार में तब्दील कर देना
गुनाह से भी कहीं ज़्यादा बुरा है
बड़ा इलज़ाम है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Hasya Kavita, Poetry
यूरिया का ज़ोर, हर डाल कमज़ोर, अब
चंपा की टहनिया पे लूम नहीं सकते
एमएमएस बनने का डर लगा रहता है
प्यार के नशे में अब झूम नहीं सकते
प्यार के हज़ार दुश्मन हर मोड़ पे हैं
एक-दूसरे के साथ घूम नहीं सकते
और अब मुआ हैलमेट गले पड़ गया
बाइक पे बैठ के भी चूम नहीं सकते
✍️ चिराग़ जैन
Article, Bakodhyanam, Chirag Jain Writings, Prose
फेसबुक की सूर्यरेखा अहर्निश गहराती जा रही है। लोगों के जीवन में फेसबुक ने इतना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है कि कुछ लोगों ने तो हर श्वास और हर उच्छ्वास की सूचना देना शुरू कर दिया है।
बहुत जल्द ही ईश्वर भी मनुष्य के जीवन की अवधि मापने के लिए श्वास, वर्ष अथवा ऋतुओं जैसी पुरातन इकाइयों के स्थान पर फेसबुक लाइक्स की गणना करेगा। फिर ये चार दिन की ज़िंदगानी सौ लाइक्स की ज़िन्दगी बन जाएगी। धर्मगुरु प्रवचनों में कहेंगे कि ईश्वर ने इस फेसबुक स्टेटस अपडेट करने के लिए ये ज़िन्दगी दी है, ऑफ़लाइन रहकर इस अनमोल जीवन को नष्ट न करो। धर्मशास्त्रों में लिखा जाएगा कि जो प्राणी दूसरों के स्टेटस पर लाइकदान नहीं करेगा उसे अगले जन्म में फेसबुक पर लॉगिन करने की सुविधा नहीं मिलेगी। दान तब भी चार प्रकार का ही रहेगा- लाइकदान, कमेंट दान, स्माइली दान और शेयर दान।
गूगलदृष्टा ऋषि हमें बताएंगे कि जो प्राणी दूसरों की अपडेट को लगातार इग्नोर करता है, उसे टैगिंग जैसे महान कष्ट को भोगना पड़ेगा। इस ख्याति से आकृष्ट हो देवतागण भी फेसबुक आई डी बना लेंगे। उदाहरण के लिए सूर्यदेव की फेसबुक प्रोफाइल पर रोज सुबह अपडेट होगा – ‘राइज़िंग फ्राॅम द ईस्ट’। इस स्टेटस के साथ सूर्यदेव अख़बार के ‘सूर्योदय समय’ की फोटो डालेंगे। चिड़िया इस स्टेटस पर ‘चीं-चीं’ कमेंट करेंगी। फूल इसके नीचे स्माइली पोस्ट करके लिखेंगे ‘खिल रहे हैं।’ दोपहर में सूर्यदेव फिर स्टेटस डालेंगे – ‘फीलिंग हॉट’। उसके नीचे पसीने का कमेंट होगा- ‘बह रहा हूँ।’
कुत्तों को रात में चिल्लाना नहीं पड़ेगा, वे आधी रात को ‘क्राइंग’ की स्माइली पोस्ट करके आराम से सो जाएंगे। चैकीदार हर एक घंटे बाद लिख देंगे- ‘जागते रहो।’ चोर उस स्टेटस को पढ़कर सावधानी पूर्वक चोरी का स्टेटस डालेंगे।
सब कुछ कितना आसान हो जाएगा। हिन्दू मुस्लिम दंगे ट्विटर-फेसबुक दंगों में तब्दील हो जाएंगे। किसी बात पर चार ट्विटरिये चार फेसबुकियों की प्रोफाइल पर पोर्न पोस्ट कर देंगे। इसके जवाब में फेसबुकिये ट्विटरियों की प्रोफाइल पर वायरस छोड़ देंगे। भयंकर दंगा होगा। ख़ूनख़राबे की जगह ब्लॉक-बवेला होने लगेगा।
सूर्य रोज़ निकलेगा लेकिन फेसबुक पर। हवा बहेगी लेकिन फेसबुक पर। चांद उगेगा लेकिन फेसबुक पर। फूल खिलेंगे लेकिन फेसबुक पर। बच्चा पैदा भी फेसबुक पर होगा, वह अपनी पहली किलकारी गले से नहीं कीबोर्ड से लिखेगा। वो रोज़ स्कूल जाने का स्टेटस डालेगा। फेसबुक पर ही शादी, वहीं बच्चे, वहीं बुढ़ापा और वहीं मौत। फेसबुक पर ही शव यात्रा होगी और वहीं दाह संस्कार।
कोई यूजर ट्विटर की प्रोफाइल डिलीट करके फेसबुक पर साइन अप करेगा तो उसे पुनर्जन्म कहा जाएगा। प्राणी इस चक्र से छुटकारा पाने के लिए धर्म की शरण में जाएगा तो धर्म उसे बताएगा कि ‘ये सब सोशल साइट्स मिथ्या हैं, इनसे मोह न रखो। इनमें तुम्हारा समय और जीवन नष्ट हो जाएगा। हमारी एप्प डाउनलोड करो। वहां अनेक यूजर्स हैं जो इन सब चक्करों से मुक्त हो अपने नेटपैक को धर्म पर व्यय कर रहे हैं। जल्दी साइन अप करो प्राणी। तुम्हारा कल्याण होगा।’
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Prose, Quotation, Unpublished
कमाल का देश है
कोई ‘कुछ भी’ बोलता है
और कोई ‘कुछ भी नहीं बोलता।
✍️ चिराग़ जैन
Article, Bakodhyanam, Chirag Jain Writings, Prose
प्रिय टैगियो!
गणतंत्र दिवस की असीम शुभकामनाओं के साथ आपके साथ एक बात सांझी करना चाहता हूँ। मैं जब अपना फ़ेसबुक लॉगिन करता हूँ तो उसमें हर बार 100-150 नोटिफ़िकेशन्स होते हैं। उनमें से अधिकतर उन पोस्ट्स के होते हैं जिनमें मुझे ज़बर्दस्ती टैग किया गया है। अक्सर उन फोटोग्राफ्स या पोस्ट्स से मेरा कोई लेना-देना नहीं होता। लेकिन लोग निरंतर कहने के बावजूद मुझे टैग करते रहते हैं। इन अनर्गल नोटिफ़िकेशन्स की सूची में कई महत्वपूर्ण नोटिफ़िकेशन्स भी होते हैं जो नज़र से छूट जाते हैं।
दुर्भाग्य की बात ये है कि इन टैगबुकियों में से कुछ ऐसे भी परिचित होते हैं जो अनफ्रैंड नहीं किये जा सकते। फेसबुक जैसे सोशल माध्यमों पर इस प्रकार किसी की स्वतंत्रता में दखलंदाज़ी क्या अच्छी बात है!
कोई हरिद्वार होकर आया, वहाँ फोटो खिंचाई और उसमें मुझे टैग कर दिया; जबकि उसके हरिद्वार जाने में मेरी कोई ग़लती या योगदान नहीं है। किसी ने गली के नुक्कड़ पर पप्पू स्टूडियो में काला चश्मा पहन कर फोटो खिंचाई और बत्तीसी दिखाते हुए मुझे टैग कर दिया, इसमें मेरी क्या ग़लती है भाई! किसी ने चंकी पांडे के साथ फोटो खिंचाई, बहुत अच्छी बात है। उसको फ़ेसबुक पर अपलोड किया, और भी अच्छी बात है, लेकिन उसमें मुझे क्यों टैग किया; ये मुझे समझ नहीं आता। अरे भाई, आप मेरी फ्रैंड लिस्ट में हो ही, आपका स्टेटस अपडेट मेरे नोटिफ़िकेशन्स में दिख ही जायेगा, मुझे ज़रूरी लगेगा तो मैं उसको लाइक भी करूंगा और उस पर टिप्पणी भी करूंगा, लेकिन टैग कर के मेरा बलात्कार क्यों किया जाता है।
हो सकता है कि मैं इस विषय को अधिक खींच रहा होऊं, लेकिन इस खीझ के पीछे मैंने कितनी झल्लाहट झेली है, इसका अनुमान यही है कि इस पोस्ट में प्रदर्शित क्रोध मेरी पीड़ा का सात-आठ प्रतिशत ही है।
स्थिति यहाँ तक भयावह हो गई है कि मैं रात को सपने में भी ‘रिमूव टैग’ का ऑप्शन ढूंढता रहता हूँ। टैग शब्द से मुझे इतनी नफ़रत हो गई है कि मैंने पंप शूज़ पहनने शुरू कर दिये हैं। टैगियों ने मुझे इतना सताया है कि मैंने ‘टैगोर’ साहित्य पढ़ना बंद कर दिया है।
बंधु! कृपया मुझे इस समस्या का कोई उचित समाधान बताने का कष्ट करें। आपकी अति कृपा होगी। मैं चाहता तो ये पोस्ट अपनी टाइमलाइन पर लिखकर आपको उसमें आपको टैग कर सकता था, लेकिन मैं टैग की पीड़ा को समझता हूँ, इसलिये जनहित में ऐसा नहीं किया।
आपका (अभी तक) अपना
टैग पीड़ित
✍️ चिराग़ जैन