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मीठी याद

पीले पड़ चुके सफ़हे पर
लिखी मिली है
केक की रेसिपी
आठवीं क्लास की
एक लड़की की हैंडराइटिंग में।
ऑईल, शुगर, चोको पाउडर…
…वगैरा वगैरा।

साँस में घुल रही है
एक चाॅकलेटी गंध
ऐसा लग रहा है
किसी उंगली पर लगा केक
चाट रहा हूँ मैं।

साथ ही
ये भी महसूस कर रहा हूँ
कि केक से ज़्यादा मीठी है
….उंगली।

✍️ चिराग़ जैन

डर लगता है

सूप पर
अनाज उछालती माँ
डाँट देती थी मुझे
जब मैं कोशिश करता था
उछलते अनाज को
छू लेने की।

डाल पर बैठी चिड़िया
फुर्र से उड़ जाती थी
जब मैं उचकता था
उसे छूने के लिए।

कई बार मन करता है
तुमको छूने का।

लेकिन डर लगता है
कहीं तुम अनाज न निकलो!
कहीं तुम चिड़िया न निकलो!

✍️ चिराग़ जैन

सियासत पनप रही है

नसीहतें अनसुनी रहेंगी, यही रवायत पनप रही है
पुरानी आफ़त तो टल गई पर नई मुसीबत पनप रही है

कहीं तिज़ारत, कहीं ज़रूरत, कहीं पे वहशत पनप रही है
अमां हटाओ भी दौरे-नौ में कहाँ शराफ़त पनप रही है

इधर मेरे घर में एक नन्हीं, हसीं नज़ाक़त पनप रही है
उधर मेरे मन में सुर्ख़ियों की तमाम दहशत पनप रही है

किसी की मजबूरियों के घुटने कभी टिकें तो ये याद रखना
जहाँ दबाया था हसरतों को वहीं बग़ावत पनप रही है

वो एक हिंदू, ये एक मुस्लिम, वो इसका दुश्मन, ये उसका दुश्मन
इसी तरह के फ़िज़ूल जुमलों पे अब सियासत पनप रही है

हरेक सच को बयान कर दें, पलट के रख दें हरेक बाज़ी
तुम्हारी मजबूरियों के दम पर, हमारी हिम्मत पनप रही है

जो एक आदत-सी हो गई है, तुम्हें हमारी ख़ुशामदों की
तुम्हारी आदत की आड़ लेकर, हमारी चाहत पनप रही है

बहुत दिनों तक संभाले रखी, तो ये मरासिम को लील लेगी
अभी मिटा दो दिमाग़ो-दिल से, अगर शिक़ायत पनप रही है

✍️ चिराग़ जैन

लफंडर-लबाड़ी

चाहती है अगर प्यार जारी रहे
मैं लफ़ंडर रहूँ, तू लबाड़ी रहे
एक ही शर्त पर है ये मुमकिन अगर
मैं कुँआरा रहूँ, तू कुँआरी रहे

घर-गृहस्थी के पचड़ों से बचकर रहें
तो मुहब्बत का नुक़सान टल जाएगा
हो गई चिल्ल-पौं बालकों की शुरू
तो हमारा दिवाला निकल जाएगा
आशिकी के लिए है ज़रूरी बहुत
पाँव हल्के रहें, जेब भारी रहे

जब कभी कोई मुझको छिछोरा कहे
तू तभी थोड़ी-थोड़ी छिछोरी बने
मैं तेरे प्यार में कुछ जुगाड़ू बनूं
तू मेरे इश्क़ में कुछ टपोरी बने
मैं मुहल्ले में रिक्शा चलाता फिरूं
तू मेरी फिक्स सिंगल सवारी रहे

लड़कियां देखकर सोचते हैं सभी
इनसे शादी करें या मुहब्बत करें
साल में एक दो गिफ़्ट देते रहें
या कि हर रोज़ की मोल आफ़त करें
पाव भर बेर से काम चल जाए तो
क्या ज़रूरी है आंगन में झाड़ी रहे

हो ज़रूरी अगर ब्याह करना तुझे
तो किसी और के नाम हो जाइयो
मैं जमूरे सा चुपचाप तकता रहूँ
तू बंदरिया सी गुमनाम हो जाइयो
फिर मेरी डुगडुगी पर मटक लीजियो
जब कभी घर से बाहर मदारी रहे

प्रेमिका के लिए मुस्कुराते रहे
और पत्नी से हम नकचढ़े हो गए
वाइफ ने टच किया, बाल चिपके रहे
प्रेमिका ने छुआ तो खड़े हो गए
प्रेमिका एक एडवांस पेमेंट है
और पत्नी हमेशा उधारी रहे

✍️ चिराग़ जैन

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