Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
इतना-सा फ़र्क है
अंधियार और उजियारे में…
…कि अंधियारा
हाथों में उठाकर
किसी को
भेंट नहीं किया जा सकता!
…कि अंधियार को
हाथों में समेटने के लिए
मुट्ठी बंद करनी होती है
और उजियारा
अंजुरी बना देता है
हथेलियों को!
…कि अंधियारा
सीमित करता है
और उजियारा
सीमाओं पर छा जाता है
असीम होकर।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished
दुनिया को भूल जाओ
ये इश्क़ की महफ़िल है
आओ हुज़ूर आओ
ये इश्क़ की महफ़िल है
जो होश में हैं उनको
दुनिया के ग़म मुबारक़
हुमको तो तुम मुबारक़
तुमको तो हम मुबारक़
हाथों में जाम उठाओ
ये इश्क़ की महफ़िल है
दिल की सुनो घड़ी भर
लोगों की फ़िक्र छोड़ो
अपनों की बात सुन लो
औरों का ज़िक्र छोड़ो
ख़ुद के क़रीब आओ
ये इश्क़ की महफ़िल है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
शहीदों ने लिखी थी कल हमारे नाम आज़ादी
मगर हमने बना डाली है इक इल्ज़ाम आज़ादी
‘ग़ुलामी की ज़दों में ज़िन्दगी दुश्वार होती है’
हमें चुपके से दे जाती है ये पैग़ाम आज़ादी
कमाई से कहीं मुश्क़िल है दौलत की हिफ़ाज़त भी
संभाले रख नहीं पाए कई सद्दाम आज़ादी
घड़ी भर को नज़र चूकी, अंधेरा हो गया ग़ालिब
छिनी दिन की, ज़रा सी चूक से, हर शाम आज़ादी
भला ऐसा हुआ क्या था कि केवल छह महीने में
कोई तेरे हवाले कर गया हे राम आज़ादी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
सच के कारण मिली नफ़रत क़ुबूल है लेकिन
झूठ के दम पे मुहब्बत नहीं अच्छी लगती
यूँ तो रिश्ते मेरे दिल को सुक़ून देते हैं
पर ये रिश्तों की सियासत नहीं अच्छी लगती
भूख जिस वक़्त कलेजा गलाने लगती है
तब ख़ुदाओं की इबादत नहीं अच्छी लगती
उनको कल तक मेरा क़िरदार बहुत भाता था
अब मेरी एक भी आदत नहीं अच्छी लगती
कैसे इस दौर के बच्चों को दुआ दे कोई
इनको पुरख़ों की नसीहत नहीं अच्छी लगती
काम जिस शख़्स का चलता हो बेइमानी से
उसको दुनिया में शराफ़त नहीं अच्छी लगती
क़ायदा जिसने मुहब्बत का पढ़ लिया हो चिराग़
उनको फिर कोई शरीयत नहीं अच्छी लगती
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
इत्र है हँसी
महक उठता है वो
जिस पर छिड़का जाए
लेकिन
जो छिड़कता है
वो तो
चमक ही उठता है।
✍️ चिराग़ जैन