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फ़र्क

इतना-सा फ़र्क है
अंधियार और उजियारे में…

…कि अंधियारा
हाथों में उठाकर
किसी को
भेंट नहीं किया जा सकता!

…कि अंधियार को
हाथों में समेटने के लिए
मुट्ठी बंद करनी होती है

और उजियारा
अंजुरी बना देता है
हथेलियों को!

…कि अंधियारा
सीमित करता है
और उजियारा
सीमाओं पर छा जाता है
असीम होकर।

✍️ चिराग़ जैन

इश्क़ की महफ़िल

दुनिया को भूल जाओ
ये इश्क़ की महफ़िल है
आओ हुज़ूर आओ
ये इश्क़ की महफ़िल है

जो होश में हैं उनको
दुनिया के ग़म मुबारक़
हुमको तो तुम मुबारक़
तुमको तो हम मुबारक़
हाथों में जाम उठाओ
ये इश्क़ की महफ़िल है

दिल की सुनो घड़ी भर
लोगों की फ़िक्र छोड़ो
अपनों की बात सुन लो
औरों का ज़िक्र छोड़ो
ख़ुद के क़रीब आओ
ये इश्क़ की महफ़िल है

✍️ चिराग़ जैन

आज़ादी

शहीदों ने लिखी थी कल हमारे नाम आज़ादी
मगर हमने बना डाली है इक इल्ज़ाम आज़ादी

‘ग़ुलामी की ज़दों में ज़िन्दगी दुश्वार होती है’
हमें चुपके से दे जाती है ये पैग़ाम आज़ादी

कमाई से कहीं मुश्क़िल है दौलत की हिफ़ाज़त भी
संभाले रख नहीं पाए कई सद्दाम आज़ादी

घड़ी भर को नज़र चूकी, अंधेरा हो गया ग़ालिब
छिनी दिन की, ज़रा सी चूक से, हर शाम आज़ादी

भला ऐसा हुआ क्या था कि केवल छह महीने में
कोई तेरे हवाले कर गया हे राम आज़ादी
✍️ चिराग़ जैन

झूठ के दम पे मुहब्बत

सच के कारण मिली नफ़रत क़ुबूल है लेकिन
झूठ के दम पे मुहब्बत नहीं अच्छी लगती

यूँ तो रिश्ते मेरे दिल को सुक़ून देते हैं
पर ये रिश्तों की सियासत नहीं अच्छी लगती

भूख जिस वक़्त कलेजा गलाने लगती है
तब ख़ुदाओं की इबादत नहीं अच्छी लगती

उनको कल तक मेरा क़िरदार बहुत भाता था
अब मेरी एक भी आदत नहीं अच्छी लगती

कैसे इस दौर के बच्चों को दुआ दे कोई
इनको पुरख़ों की नसीहत नहीं अच्छी लगती

काम जिस शख़्स का चलता हो बेइमानी से
उसको दुनिया में शराफ़त नहीं अच्छी लगती

क़ायदा जिसने मुहब्बत का पढ़ लिया हो चिराग़
उनको फिर कोई शरीयत नहीं अच्छी लगती

✍️ चिराग़ जैन

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