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स्वतन्त्रता

मन के मलंग मतवाले महानायकों की
कुर्बानियों का परिणाम है स्वतन्त्रता
स्वर की बुलन्दियों ने जो अदालतों में किया
क्रान्ति का वो दिव्य यशगान है स्वतन्त्रता
शहीदों ने भूख-प्यास सह के बचाया जिसे
भारती का वही स्वाभिमान है स्वतन्त्रता
लाल-बाल-पाल औ सुभाष जैसे ऋषियों की
साधना का शुभ्र वरदान है स्वतन्त्रता

✍️ चिराग़ जैन

मीडिया : एक चेहरा ये भी

हमारे मुल्क़ की क़िस्मत में ये विस्फोट क्यूँकर था
शहर से गाँव तक माहौल कल दमघोट क्यूँकर था
पसीना चू रहा था सबकी पेशानी से पर फिर भी
ख़बर पढ़ते हुए उनके बदन पर कोट क्यूँकर था

✍️ चिराग़ जैन

मुल्क़ में दहशत

जो फैलाने चले हैं मुल्क़ में दहशत धमाकों से
वही छुपते फिरा करते हैं इक मुद्दत धमाकों से

न ख़बरों में उछाल आया, न बाज़ारों में सूनापन
न बिगड़ी मुल्क़ के माहौल की सेहत धमाकों से

वही हल्ला, वही चीखें, वही ग़ुस्सा, वही नफ़रत
हमें अब हो गई इस शोर की आदत, धमाकों से

ये दहशतग़र्द अब इस बात से आगाह हो जाएँ
कि अब आवाम की बढ़ने लगी हिम्मत धमाकों से

वज़ूद अपना जताने के लिए वहशी बने हैं जो
उन्हें हासिल नहीं होती कभी शोहरत धमाकों से

✍️ चिराग़ जैन

जैन

राष्ट्र के निमित्त बलिदान कैसे करते हैं
भामाशाह वाली वो कहानी मत भूलना
आस्था के बल से जो कर्मों से जीत गई
महासती मैना जैसी रानी मत भूलना
सत्य के लिए जिन्होंने प्राण तक त्याग दिए
अकलंक जैसे महादानी मत भूलना
राजुल ने जहाँ धोई मेहंदी सुहागवाली
गिरनार का वो लाल पानी मत भूलना

जियो और जीने दो की बात करते हैं हम
कहीं और ऐसा उपदेश नहीं मिलता
मृत्यु के क्षणों को भी महोत्सव-सा मानते हैं
धरती पे ऐसा परिवेश नहीं मिलता
सारा सुख-वैभव जो जीत के भी त्याग आये
ऐसा कोई और गोमटेश नहीं मिलता
तप-त्याग से यहाँ परमपद मिलते हैं
हाथी-घोड़े वालों को प्रवेश नहीं मिलता

पंथ हैं अनेक जिनमत में भले ही पर
मोक्षमार्ग वाला सुविचार बस एक है
सैंकड़ों हों वाद औ विवाद किंतु सत्य है कि
अहिंसा पे सबका विचार बस एक है
मान्यताएं सबकी भले हीं हों विभिन्न किन्तु
पाँच पदवाला नवकार बस एक है
कैसे नरकों से निर्वाण पहुँचेगा जीव
पूरे जिन-आगम का सार बस एक है

जैन वो नहीं कि बस नाम में लिखा हो जैन
जैन वो है जिसके विचार जैन हो गए
जाति भले कोई भी हो, आप जैन ही रहेंगे
आत्मा के यदि संस्कार जैन हो गए
जीवदया और शाकाहार के हैं प्रतिबिंब
सत्य औ अहिंसा के आधार जैन हो गए
किन्तु मातृभूमि पे पड़ा है कभी संकट तो
ख़ुशी-ख़ुशी राष्ट्र पे निसार जैन हो गए
✍️ चिराग़ जैन

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