Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
हवस की राह चलकर आदमी मायूस होता है
सदा आपे से बाहर आदमी मायूस होता है
कभी मायूस होकर आदमी खोता है उम्मीदें
कभी उम्मीद खोकर आदमी मायूस होता है
न हो उम्मीद तो मायूसियाँ छू भी नहीं सकतीं
हमेशा आरज़ू कर आदमी मायूस होता है
हज़ारों ख्वाब बेशक़ बन्द ऑंखों में पलें लेकिन
पलक खुलने पे अक्सर आदमी मायूस होता है
जहाँ दरकार हो दो घूँट मीठे साफ पानी की
वहाँ पाकर समन्दर आदमी मायूस होता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
किसी का क़द ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं
किसी का पद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं
कहाँ गहराई है किसकी यही सबको नहीं दिखता
कोई बरगद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए
बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए
दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए
चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए
घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं
एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए
ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए
हर बशर में इक अदद इन्सान होना चाहिए
प्यार से इनक़ार भी कर दो तो ख़ुश हो जाएगा
कौन कहता है कि बचपन को खिलोना चाहिए
ज़िन्दगी बेशक़ ज़माने को अता कीजे मगर
दो घड़ी ख़ुद के लिए भी वक्त होना चाहिए
ज़िन्दगी को मंच कहते हो तो फिर इस मंच पर
आपका भी तो कोई किरदार होना चाहिए
महफ़िलें केवल ठहाकों के लिए तय हैं यहाँ
ऑंसुओं का जश्न ख़ुद के साथ होना चाहिए
बिन कलम बिन रोशनाई भी ग़ज़ल हो जाएगी
सिर्फ दिल में दर्द का सैलाब होना चाहिए
अश्क़ जब ऑंखों की हद को लांघ जाएँ तो ‘चिराग़’
अपनी बाँहों में सिमट जी भर के रोना चाहिए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
कोई चीखा है तो उसने बड़ी तड़पन सही होगी
कोई यूँ ही नहीं चुभता कहीं टूटन रही होगी
किसी को सिर्फ़ पत्थर-दिल समझ कर छोड़ने वालो
टटोलो तो सही उस दिल में इक धड़कन रही होगी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
सज़ाओं में मैं रियायत का तलबदार नहीं
क़ुसूरवार हूँ, कोई गुनाहगार नहीं
मैं जानता हूँ कि मेरा क़ुसूर कितना है
मुझे किसी के फ़ैसले का इन्तज़ार नहीं
✍️ चिराग़ जैन