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बंदिशें मुस्कान पर

लोग अब दौलत तिजोरी में कमाकर रख रहे हैं
और कुछ हैं जो बाज़ारों में धमाके रख रहे हैं
रख रही है जब सियासत बंदिशें मुस्कान पर
तब यहाँ कुछ लोग जीवन में ठहाके रख रहे हैं

✍️ चिराग़ जैन

राॅयल्टी

प्रेम
जीवन का याचक नहीं
ख़ुशियों का सौदागर है।

मुनाफ़ाख़ोर नहीं है प्रेम
एक पल की
ख़ुशी के बदले
एक ही पल लेगा
हमारे जीवन से

फिर हम
जीवन भर
प्रसन्न रहें
उस पल की
स्मृतियों में।

प्रेम
कभी नहीं आएगा
स्मृतियों की
राॅयल्टी मांगने।

✍️ चिराग़ जैन

उम्मीद के बिना

तुम हमेशा
मुझे दोषी ठहराती हो
कि मैं अपने रिश्तों में
उम्मीदें बहुत रखता हूँ

लेकिन समझ नहीं पाता हूँ मैं
कि उम्मीद के बिना
निभ ही कैसे सकता है
कोई रिश्ता

…..उम्मीद के बिना तो
दान तक नहीं दिया जाता!

✍️ चिराग़ जैन

चयन

दुःख का अभाव
सुख नहीं है।
मुश्किल की अनुपस्थिति
आसानी नहीं है।

दरअस्ल
आसान तो
कुछ है ही नहीं

जीवन एक अवसर है
कम मुश्किल का
चयन करने के लिए।

मुझे चुनना था
दो में से एक वाक्यांश-
“काश ये न होता!”
या
“काश वो होता!”

मैंने दूसरा विकल्प चुना।
सुखी हूँ या नहीं
कह नहीं सकता

लेकिन
दुःखी बिल्कुल नहीं हूँ।

✍️ चिराग़ जैन

पूजा के हक़दार

जिस डाली का काटा जाना आज अखर जाता है तुमको
उस डाली के कटने से ही कल को तुम फलदार बनोगे
जिस छैनी के छूने भर से चीख़ निकलती है पत्थर की
उस छैनी की चोटों से तुम पूजा के हक़दार बनोगे

अनुभव के दो हाथ समूचे माटी-माटी सन जाएंगे
तब जाकर मिट्टी के ढेले को किंचित आकार मिलेगा
मिट्टी से पहले हाथों की भाग्य लकीरें घिस जाएंगी
तब बर्तन कहला पाने का मिट्टी को अधिकार मिलेगा
जिन जलते शोलों से तन-मन सब कुछ झुलसेगा भीतर तक
उनके कारण ही तुम प्यासे ओंठों पर बौछार बनोगे

गंगा बनकर पुजना है तो, गोमुख से झरना ही होगा
बूंदों को बारिश बनना है, बादल को मरना ही होगा
रामशरण स्वीकार नहीं हो, और मुक्ति की इच्छा हो तो
कंचन मृग का स्वांग रचा कर, सीता को हरना ही होगा
अपने सारे सुख को अपने हाथों वनवासी कर दोगे
तब सम्भव है तुम जीते जी धरती पर अवतार बनोगे

✍️ चिराग़ जैन

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