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क्षमाभाव

झुकना, माफ़ी मांगना, कठिन बहुत है यार
लेकिन इसके बाद है, चैन-सुकून अपार

बढ़कर माफ़ी मांगिए, छोड़ गुमान गुरूर
हाँ, हल्का हो जाएगा, मन का बोझ हुज़ूर

कुपित हुए, कुढ़ते रहे, क्रोधी, मूढ़ अधीर
क्षमाभाव को धारकर, सहज रहे सो वीर

✍️ चिराग़ जैन

सियासत पनप रही है

नसीहतें अनसुनी रहेंगी, यही रवायत पनप रही है
पुरानी आफ़त तो टल गई पर नई मुसीबत पनप रही है

कहीं तिज़ारत, कहीं ज़रूरत, कहीं पे वहशत पनप रही है
अमां हटाओ भी दौरे-नौ में कहाँ शराफ़त पनप रही है

इधर मेरे घर में एक नन्हीं, हसीं नज़ाक़त पनप रही है
उधर मेरे मन में सुर्ख़ियों की तमाम दहशत पनप रही है

किसी की मजबूरियों के घुटने कभी टिकें तो ये याद रखना
जहाँ दबाया था हसरतों को वहीं बग़ावत पनप रही है

वो एक हिंदू, ये एक मुस्लिम, वो इसका दुश्मन, ये उसका दुश्मन
इसी तरह के फ़िज़ूल जुमलों पे अब सियासत पनप रही है

हरेक सच को बयान कर दें, पलट के रख दें हरेक बाज़ी
तुम्हारी मजबूरियों के दम पर, हमारी हिम्मत पनप रही है

जो एक आदत-सी हो गई है, तुम्हें हमारी ख़ुशामदों की
तुम्हारी आदत की आड़ लेकर, हमारी चाहत पनप रही है

बहुत दिनों तक संभाले रखी, तो ये मरासिम को लील लेगी
अभी मिटा दो दिमाग़ो-दिल से, अगर शिक़ायत पनप रही है

✍️ चिराग़ जैन

बंदिशें मुस्कान पर

लोग अब दौलत तिजोरी में कमाकर रख रहे हैं
और कुछ हैं जो बाज़ारों में धमाके रख रहे हैं
रख रही है जब सियासत बंदिशें मुस्कान पर
तब यहाँ कुछ लोग जीवन में ठहाके रख रहे हैं

✍️ चिराग़ जैन

राॅयल्टी

प्रेम
जीवन का याचक नहीं
ख़ुशियों का सौदागर है।

मुनाफ़ाख़ोर नहीं है प्रेम
एक पल की
ख़ुशी के बदले
एक ही पल लेगा
हमारे जीवन से

फिर हम
जीवन भर
प्रसन्न रहें
उस पल की
स्मृतियों में।

प्रेम
कभी नहीं आएगा
स्मृतियों की
राॅयल्टी मांगने।

✍️ चिराग़ जैन

उम्मीद के बिना

तुम हमेशा
मुझे दोषी ठहराती हो
कि मैं अपने रिश्तों में
उम्मीदें बहुत रखता हूँ

लेकिन समझ नहीं पाता हूँ मैं
कि उम्मीद के बिना
निभ ही कैसे सकता है
कोई रिश्ता

…..उम्मीद के बिना तो
दान तक नहीं दिया जाता!

✍️ चिराग़ जैन

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