Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
साफ़-साफ़ दिख रही है
नींव की कमज़ोरी
दीवार की लीपापोती
छुपा नहीं पा रही है
भीतर की दरारें।
एक भय-सा झाँक रहा है
झरोखों से!
अंधेरा ही अंधेरा
छा गया है
रौशनदान के आरपार
सब समझ आ रहा है
कि क्यों
लटक गया है
कंगूरों का चेहरा!
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
जब मन से निःसृत शब्दों का हर आभूषण बहुत खरा हो
अपनेपन का भाव किसी पल अंतस् में आकंठ भरा हो
जब दर्शन का दंभ भुला कर निश्छल स्रोता स्वयं झरा हो
या भौतिक सुख की दलदल में निस्पृहता का पल उभरा हो
उस पल चाहे पूजन लिख दूँ
चाहे प्रणय निवेदन लिख दूँ
जीवन की अभिलाषा लिख दूँ
दुःख के नाम दिलासा लिख दूँ
उस पल कंठ पुकारेगा तो ईश्वर को भी आना होगा
उस पल जो शब्दों में उतरेगा वो सच हो जाना होगा
जब मन के सोये नभमंडल में कविता हुंकार भरेगी
जब भावों की बिजली कवि के नयनों में टंकार करेगी
जब मति की सीमा मन के परकोटे तक विस्तार करेगी
जब शब्दों की देवी मेरे जीवन पर उपकार करेगी
उस पल सब कुछ अनुपम होगा
मन से मति का संगम होगा
जीवन पर अर्पित यम होगा
जितना भी होगा कम होगा
उस पल सब बंधन टूटेंगे, खण्डित ताना-बाना होगा
उस पल जो शब्दों में उतरेगा वो सच हो जाना होगा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
तुमसे मिलते ही
बह निकलती हो कविता
-ऐसा नहीं है।
न तो मोम है कविता
न ही आग हो तुम।
तुम तो
अंजुरी हो
छपाक से भर जाती हो
कविता में डूबकर!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
आत्मघात करने के लिये जितना बड़ा कलेजा चाहिये, क्या उतने बड़े कलेजे से जिया नहीं जा सकता!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
क्या हुआ हासिल बुलंदी पर पहुँच कर ऐ ख़ुदा
जश्ने-दिल यां जश्ने अब्रां, जश्ने-रूह, जश्ने-सबा
✍️ चिराग़ जैन