Chirag Jain Writings, Free Verse, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
जब तक तुम संग थीं
मैंने नहीं तलाशी कोई ख़ुशी
नहीं खोजी कोई मुस्कान
नहीं ढूँढ़ी कोई हँसी
…ज़रूरत ही नहीं पड़ी।
अब तलाशता फिरता हूँ
एक-मासूम सी ख़ुशी
अपने दिल के लिये।
एक कोमल-सी मुस्कान
अपने होंठों के लिये।
एक गीली-सी हँसी
अपने चेहरे के लिये।
और एक पावन-सी चमक
अपनी आँखों के लिये।
लेकिन रीती ही रह जाती है
तलाशों का जल भरने के लिए बढ़ती
छोटी-सी अंजुरी।
दूर तक यात्रा करने के बाद
पलकों के भीतर
लौट आती हैं गीली निगाहें
और देर तक इंतज़ार करने के बाद
थककर बैठ जाता हूँ मैं।
हाय राम!
खुशियों को भी
अभी व्यस्त होना था!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
अजब सी बात होती है मुहब्बत के तराने में
क़तल दर क़त्ल होते हैं सनम के मुस्कुराने में
मज़ा हमको भी आता है मज़ा उनको भी आता है
उन्हें नज़रें चुराने में हमें नज़रें मिलाने में
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
अन्तस् की पावन भोगभूमि
और मानस की पवित्र भावभूमि पर बसी
अधरों की सौम्यता।
लोचनयुगल में अनवरत प्रवाहमान
विश्वास की पारदर्शी भागीरथी
अनायास ही छलक पड़ती है
सागरमुक्ता-सी
दन्तपंक्ति के पार्श्व से प्रस्फुटित
निश्छल खिलखिलाहट के साथ।
और इस पल को
शब्दों में बांधने के
निरर्थक प्रयास करके
कसमसाकर रह जाता है शब्दकोश।
अप्रासंगिक लगने लगती हैं
सृष्टि की समस्त लौकिक-पारलौकिक उपमाएँ
क्योंकि
बहुत अन्तर होता है
उपमान और उपमेय में!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
उनकी बातों में इक इबारत है
उनसे मिलना भी इक इबादत है
इस ज़मीं के ख़ुदा हैं वो बन्दे
जिनके दिल में कहीं मुहब्बत है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
हम क़लम थामकर सोचते रह गए
भाव आँसू बने, आँख से बह गए
इक ग़ज़ल काग़ज़ों पर उतर तो गई
दर्द दिल के मगर अनकहे रह गए
✍️ चिराग़ जैन