अनकहा हम क़लम थामकर सोचते रह गए भाव आँसू बने, आँख से बह गए इक ग़ज़ल काग़ज़ों पर उतर तो गई दर्द दिल के मगर अनकहे रह गए ✍️ चिराग़ जैन