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उम्मीद के बिना

तुम हमेशा
मुझे दोषी ठहराती हो
कि मैं अपने रिश्तों में
उम्मीदें बहुत रखता हूँ

लेकिन समझ नहीं पाता हूँ मैं
कि उम्मीद के बिना
निभ ही कैसे सकता है
कोई रिश्ता

…..उम्मीद के बिना तो
दान तक नहीं दिया जाता!

✍️ चिराग़ जैन

टोटका

बहुत उपजाऊ है
मेरे दिल की मिट्टी।
पनप जाता है
हर बीज
आसानी से।

बहुत आसानी से
फूट पड़ता है अंकुर,
बहुत आसानी से
द्विदल होता है बीज,
…लाल-लाल कोंपलें
……ताज़ा हरापन।

कभी ओस नहाई पत्तियाँ
तो कभी
गुपचुप बतियाती
डालियाँ।

कुछ पौधों पर
आ जाता है
बौर भी…
…लेकिन किसी डाल ने
कभी नहीं किया
फल का शृंगार…!

…शायद
कोई टोटका कर देता है
मेरी हरियाली पर!

✍️ चिराग़ जैन

तुम्हारा लौट कर जाना अचानक

परिंदों का सिहर जाना अचानक
किसी आहट से डर जाना अचानक

तुम्हारा लौट कर जाना अचानक
नई ख़ुशियों का मर जाना अचानक

कई दिन से जो मन में उठ रही थी
उस आंधी का गुज़र जाना अचानक

अचानक ज़िन्दगी से जा रहे हो
कभी हो पाए तो आना, अचानक

✍️ चिराग़ जैन

दिल टूट गया

आस का दामन छूट गया
लगा मुक़द्दर फूट गया
फिर से पलकें भीग गईं
लो फिर से दिल टूट गया

पहले भी कई बार हुआ
मन में ग़ज़ब ख़ुमार हुआ
नैनों में सपने उभरे
और ये दिल लाचार हुआ
अब फिर वही कहानी है
हालत वही पुरानी है
अमृत पीना चाहा तो
भीतर कड़वा घूंट गया

प्यार हुआ तो पीर मिली
सबको ये तक़दीर मिली
कब लैला को क़ैस मिला
कब रांझे को हीर मिली
सबका ये अफ़साना है
क़िस्सा वही पुराना है
कहीं ज़माने की ज़िद थी
किसी से दिलबर रूठ गया

जीवन एक कहानी है
दुनिया आनी-जानी है
फिर भी गर दिल रोए तो
ये इसकी नादानी है
नादानी क्यों करता है
क्यों सपनों पर मरता है
जीवन भर का सच बाक़ी
पल दो पल का झूठ गया
✍️ चिराग़ जैन

हमारी प्राथमिकताएँ अलग हैं

हमारे मन में आशाएँ अलग हैं
मगर हाथों में रेखाएँ अलग हैं

हमारी अपनी सीमाएँ अलग हैं
तुम्हारी भी विवशताएँ अलग हैं

हमारी ख़ुद से तुलना मत करो तुम
हमारी प्राथमिकताएँ अलग हैं

करी है हमने सी.ए. की पढ़ाई
मगर अम्मा की गणनाएँ अलग हैं

असीमित स्वप्न बोए कल्पना ने
मगर अब वास्तविकताएँ अलग हैं

विषय-सूची में लिक्खा भाईचारा
मगर भीतर की शिक्षाएँ अलग हैं

जवानी का नशा ये याद रक्खे
बुढ़ापे की समस्याएँ अलग हैं
✍️ चिराग़ जैन

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