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दिल्ली

रोज़ उजड़े, रोज़ सँवरे, इस शहर का दिल अलग है मत मिसालें दो हमारी, अपना मुस्तकबिल अलग है कुछ अलग है नूर दिल्ली का दिल बहुत मशहूर दिल्ली का खण्डहरों के साथ कितने युग खड़े हैं मुँह उठाए ख़ून में भीगी रही है साज़िशों के ज़ख़्म खाए पर इन्हीं सब साज़िशों ने रच दिया इतिहास जग में...
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