दशहरा
दुष्टों का संहार कर, संतों पर कर गर्व
यही सीख सिखला रहा, हमें दशहरा पर्व
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Poetry, Unpublished
दुष्टों का संहार कर, संतों पर कर गर्व
यही सीख सिखला रहा, हमें दशहरा पर्व
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Poetry, Unpublished
महानगर में इस तरह, बदला हर त्यौहार
अब तोरण करते नहीं, खड़िया का शृंगार
रेडिमेड में ढँक गया, सारा हर्ष-किलोल
सोन बनाती बेटियाँ, खड़िया-गेरू घोल
ना मोली की सौम्यता, ना रेशम की डोर
अब राखी पर दिख रहा, प्लास्टिक चारों ओर
कितना डेवलप हो गया, ये पुरख़ों का देस
चॉकलेट ने कर दिया, बरफ़ी को रिप्लेस
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
जीवन बाती से जुड़े, पुरुषार्थों की आग।
हर आंगन संदीप्त हो, जाय अंधेरा भाग ॥
दिव्य-दिव्य हों कल्पना, दिव्य-दिव्य हों रंग।
दिव्य अल्पनाएँ बनें, हों सब दिव्य प्रसंग ॥
पावन पुष्पों से गुँथें, ऐसे बन्धनवार।
जिन्हें लगाकर सज उठें, सबके तोरणद्वार ॥
भोर समीरों में घुलें, गेंदे के मकरंद।
सांझ ढले कर्पूर की, हर दिसि भरे सुगन्ध ॥
लक्ष्मी का अवतार हो, हाथ लिए संतोष।
जिससे खाली हो सकें, सभी लालसा कोष॥
पथ पर हो दीपावली, मन में हो मकरंद।
वाणी में मिष्ठान्न हो, जीवन में आनंद॥
मन दशरथ, केकैयी कुमति, देह अयोध्या धाम।
तृष्णा इक वनवास है, सुख के क्षण श्रीराम॥
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
हम सरिता सम बन जाएँ
कविता-सरगम-ताल-राग के सागर में खो जाएँ
सात सुरों के रंगमहल में साधक बनकर घूमंे
नयनों से मलहार बहे माँ, दादर पर मन झूमे
भोर भैरवी संग बिताएँ, सांझहु दीपक गाएँ
हम सरिता सम बन जाएँ
हे वीणा की धरिणी, हमको वीणामयी बना दो
ज्ञानरूपिणी मेरे मन में ज्ञान की ज्योत जगा दो
कण्ठासन पर आन विराजो इतना ही वर चाहें
हम सरिता सम बन जाएँ
✍️ चिराग़ जैन
Blank Verse, Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
अमावस के आकाश में रौशनी का खेल
माटी के दीपकों में फुँकता हुआ तेल
चौराहों पर बिखरी बंगाली मिठाई
और आग में जलती देश की कमाई
मेरे मन में कुछ प्रश्न भर जाती है
और मुझे सोचने पर विवश कर जाती है
क्या ग़रीब के घर से ज़्यादा अंधकारमय है आकाश?
क्या निर्धनकाया से ज़्यादा रूखापन है दीपकों के पास?
क्या सड़क को भूखों से ज़्यादा भूख लगती है?
क्या मेरे देश में फूँकने के लिये भी कमाई बचती है?
काश,
ये सारे प्रश्न
हमारी राहों से सदा-सदा के लिये मिट जायें
इसी कामना के साथ संभव हैं
दीपावली की शुभकामनाएँ।
✍️ चिराग़ जैन
संपर्क करें