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यादों के ताजमहल में

मैंने मुस्कानें भोगी हैं अब मैं ग़म भी सह लूँगा स्मृतियाँ दिल में उफनीं तो आँसू बनकर बह लूँगा तुम सपनों की बुनियादों पर रँगमहल चिनवा लेना मैं यादों के ताजमहल में शासक बनकर रह लूँगा ✍️ चिराग़...

हुनर

तनहा-तनहा था सफ़र क्या कहिए आपका साथ मगर क्या कहिए मुझको मूरत में कर दिया तब्दील तेरे हाथों का हुनर क्या कहिए ✍️ चिराग़...

सरस्वती वंदना

हम सरिता सम बन जाएँ कविता-सरगम-ताल-राग के सागर में खो जाएँ सात सुरों के रंगमहल में साधक बनकर घूमंे नयनों से मलहार बहे माँ, दादर पर मन झूमे भोर भैरवी संग बिताएँ, सांझहु दीपक गाएँ हम सरिता सम बन जाएँ हे वीणा की धरिणी, हमको वीणामयी बना दो ज्ञानरूपिणी मेरे मन में ज्ञान की...

मन में श्रद्धा हो तो

प्रेमी को प्रेमी का होना भर ही काफ़ी होता है मन में श्रद्धा हो तो इक पत्थर ही काफ़ी होता है ग़ैरों के संग रहना महलों में भी रास न आएगा अपनापन मिल जाए तो कच्चा घर ही काफ़ी होता है ✍️ चिराग़...
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