Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
“ओहो!
कितना कूड़ा हो गया।
आग लगे इस मौसम में।
मार आंधी-तूफ़ान…
सारे आंगन में कीचड़ हो गई।
देखियो,
उधर सारी अंबियाँ झड़ गईं।
कैसी हरी डाल टूट गई नीम की!
…इस रामजी को भी चैन ना है!
कै तो पसीना चुआवै
कै ऐसा तूफान मचावै।”
अपने आपसे बतियाती हुई
पानी सूँत रही है नानी।
और
हौले से सूरज चमका कर
हैल्प कर रहे हैं
शर्मिंदा रामजी!
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose
दिल्ली विश्वविद्यालय में नये पाठ्यक्रम लागू हो गये हैं। चार साल वाला। कल स्नातक स्तर की हिंदी की पाठ्य पुस्तक से मुठभेड़ हो गयी। कहने लगी मैं साहित्य की पुस्तक हूँ। सुनकर मेरे भीतर के साहित्यिक ने कनखियों से एकाध पृष्ठ उघाड़ दिये। ये इत्तेफ़ाक़ ही था कि जो पृष्ठ खुला उस पर शाहरुख़ ख़ान का चित्र था, रा-वन वाला। मेरे साहित्यकार को कुछ शंका सी हुई। अगला पृष्ठ खोला, तो वो बोला- बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी तो सीधी-सादी लड़की शराबी हो गयी। …मैंने चारों तरफ़ नज़र घुमाई, शायद कहीं तारांकित लिखा हो- ‘शराब पीना सेहत के लिये हानिकारक है, इस पुस्तक में सम्मिलित कोई भी कवि शराब का सेवन या उसका प्रचार नहीं करता।’ …लेकिन अफ़सोस ऐसा कुछ नहीं दिखा। मेरा साहित्यकार आगे बढ़ा -‘जींस पहन के जो मैंने मारे ठुमके, तो लट्टू पड़ोसन की भाभी हो गयी। साहित्यकार कल्पना के कक्ष में खो गया। एक प्रोफ़ेसर काले गॉगल्स लगाये, मिनि स्कर्ट और शॉर्ट टॉप पहनकर ईअरफोन कान में लगाये विवेकानंद स्टेच्यू के आगे से गुज़रते हुए हिंदी विभाग में प्रवेश करती है।
40 लड़कों की कक्षा में प्रवेश करते ही हर विद्यार्थी से कड़ाई से पूछती है, आप में से जिसके पड़ोस में कोई पड़ोसन न हो बाहर हो जाओ। 10 लड़के बाहर चले जाते हैं। फिर पूछती है जिसकी पड़ोसन की भाभी न हो वो बाहर चला जाये। 20 विद्यार्थी फिर बाहर चले गये। 10 शेष बचे। अध्यापिका ने प्रत्येक छात्र से पड़ोसन के अंगोपांग की जानकारियां जुटानी शुरू ही की थी कि टोकने की आदत से मजबूर एक विद्यार्थी ने प्रश्न किया- मैडम ये बलम पिचकारी क्या होती है। मैडम ने साहित्य के सम्मान के लिये तुरंत बलम और पिचकारी के मध्य अल्पविराम लगाया। घर जाकर अध्यापिका अल्पविराम को राखी बांधेगी। यदि अल्पविराम समय पर न आता तो वह छात्र समास रूपी दुश्शासन का प्रयोग कर अध्यापिका का चीर, कोष्ठक में मिनी स्कर्ट, हरण कर लेता।
अभी एक संकट टला ही था कि दूसरा प्रश्न आ गया, मैडम प्रस्तुत पाठ में पड़ोसन की भाभी ही लट्टू क्यों हो रही है, पड़ोसन क्यों नहीं। क्या कवि अपनी प्रेयसी की भाभी पर फ्लैट है? क्या कवि शादीशुदा महिलाओं पर अधिक रीझता है।
अध्यापिका प्रश्न का उत्तर तलाशती इससे पूर्व ही एक और प्रश्न उछला- मैडम, यदि यह कविता किसी कवयित्री द्वारा रचित है तो इसमें लट्टू होने का कर्म पड़ोसन के भैया को करना चाहिये, भाभी को नहीं। और अगर ये कविता कोई कवि लिख रहा है तो बलम की पिचकारी से आहत होकर वह उन्मादी क्यों हुआ जाता है। क्या यह कविता समलैंगिकता का समर्थन करती है?
कक्षा के प्रश्नों से घबराकर अध्यापिका कक्षा से और साहित्यकार कल्पना से बाहर आ गये। पलटते-पलटते एक पृष्ठ पर तुलसी, कबीर दिखाई दिये। आरक्षित से। उपेक्षित से। साहित्यकार ने क्षोभ में भरकर कहा- ये पुस्तक साहित्य की नहीं है। पुस्तक ने इतराते हुए प्रेमचंद का निबंध दिखाया… चुप रहो। इसमें प्रेमचंद हैं, जो प्रेमचंद के साथ छप गया, वो सब साहित्य है।
जाओ अपना रास्ता नापो। मत मानो मुझे साहित्य। छात्र तो मानेंगे ही, 75 में से 55 नम्बर मास्टर की दया पर मिलेंगे। नहीं मानेंगे तो फैल करवा दूंगी चारों सालों कू!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Prose, Quotation, Unpublished
पुरखों ने उदाहरण प्रस्तुत किया कि युद्ध के माहौल में भी धर्म की चर्चा की जा सकती है, हमने उदाहरण प्रस्तुत किया कि धर्म की चर्चा में भी युद्ध किये जा सकते हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Article, Bakodhyanam, Chirag Jain Writings, Prose
फेसबुक की सूर्यरेखा अहर्निश गहराती जा रही है। लोगों के जीवन में फेसबुक ने इतना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है कि कुछ लोगों ने तो हर श्वास और हर उच्छ्वास की सूचना देना शुरू कर दिया है।
बहुत जल्द ही ईश्वर भी मनुष्य के जीवन की अवधि मापने के लिए श्वास, वर्ष अथवा ऋतुओं जैसी पुरातन इकाइयों के स्थान पर फेसबुक लाइक्स की गणना करेगा। फिर ये चार दिन की ज़िंदगानी सौ लाइक्स की ज़िन्दगी बन जाएगी। धर्मगुरु प्रवचनों में कहेंगे कि ईश्वर ने इस फेसबुक स्टेटस अपडेट करने के लिए ये ज़िन्दगी दी है, ऑफ़लाइन रहकर इस अनमोल जीवन को नष्ट न करो। धर्मशास्त्रों में लिखा जाएगा कि जो प्राणी दूसरों के स्टेटस पर लाइकदान नहीं करेगा उसे अगले जन्म में फेसबुक पर लॉगिन करने की सुविधा नहीं मिलेगी। दान तब भी चार प्रकार का ही रहेगा- लाइकदान, कमेंट दान, स्माइली दान और शेयर दान।
गूगलदृष्टा ऋषि हमें बताएंगे कि जो प्राणी दूसरों की अपडेट को लगातार इग्नोर करता है, उसे टैगिंग जैसे महान कष्ट को भोगना पड़ेगा। इस ख्याति से आकृष्ट हो देवतागण भी फेसबुक आई डी बना लेंगे। उदाहरण के लिए सूर्यदेव की फेसबुक प्रोफाइल पर रोज सुबह अपडेट होगा – ‘राइज़िंग फ्राॅम द ईस्ट’। इस स्टेटस के साथ सूर्यदेव अख़बार के ‘सूर्योदय समय’ की फोटो डालेंगे। चिड़िया इस स्टेटस पर ‘चीं-चीं’ कमेंट करेंगी। फूल इसके नीचे स्माइली पोस्ट करके लिखेंगे ‘खिल रहे हैं।’ दोपहर में सूर्यदेव फिर स्टेटस डालेंगे – ‘फीलिंग हॉट’। उसके नीचे पसीने का कमेंट होगा- ‘बह रहा हूँ।’
कुत्तों को रात में चिल्लाना नहीं पड़ेगा, वे आधी रात को ‘क्राइंग’ की स्माइली पोस्ट करके आराम से सो जाएंगे। चैकीदार हर एक घंटे बाद लिख देंगे- ‘जागते रहो।’ चोर उस स्टेटस को पढ़कर सावधानी पूर्वक चोरी का स्टेटस डालेंगे।
सब कुछ कितना आसान हो जाएगा। हिन्दू मुस्लिम दंगे ट्विटर-फेसबुक दंगों में तब्दील हो जाएंगे। किसी बात पर चार ट्विटरिये चार फेसबुकियों की प्रोफाइल पर पोर्न पोस्ट कर देंगे। इसके जवाब में फेसबुकिये ट्विटरियों की प्रोफाइल पर वायरस छोड़ देंगे। भयंकर दंगा होगा। ख़ूनख़राबे की जगह ब्लॉक-बवेला होने लगेगा।
सूर्य रोज़ निकलेगा लेकिन फेसबुक पर। हवा बहेगी लेकिन फेसबुक पर। चांद उगेगा लेकिन फेसबुक पर। फूल खिलेंगे लेकिन फेसबुक पर। बच्चा पैदा भी फेसबुक पर होगा, वह अपनी पहली किलकारी गले से नहीं कीबोर्ड से लिखेगा। वो रोज़ स्कूल जाने का स्टेटस डालेगा। फेसबुक पर ही शादी, वहीं बच्चे, वहीं बुढ़ापा और वहीं मौत। फेसबुक पर ही शव यात्रा होगी और वहीं दाह संस्कार।
कोई यूजर ट्विटर की प्रोफाइल डिलीट करके फेसबुक पर साइन अप करेगा तो उसे पुनर्जन्म कहा जाएगा। प्राणी इस चक्र से छुटकारा पाने के लिए धर्म की शरण में जाएगा तो धर्म उसे बताएगा कि ‘ये सब सोशल साइट्स मिथ्या हैं, इनसे मोह न रखो। इनमें तुम्हारा समय और जीवन नष्ट हो जाएगा। हमारी एप्प डाउनलोड करो। वहां अनेक यूजर्स हैं जो इन सब चक्करों से मुक्त हो अपने नेटपैक को धर्म पर व्यय कर रहे हैं। जल्दी साइन अप करो प्राणी। तुम्हारा कल्याण होगा।’
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
सौम्य धुनों से क्या जीते रीमिक्सों का गड़बड़झाला
ओरिजनल से पस्त रहेगा, हर नकली-शकली वाला
जब महफ़िल में गुंजित होगी, बच्चन जी की मधुशाला
क्या कर लेंगी शीला-मुन्नी, क्या कर लेगा ऊलाला
✍️ चिराग़ जैन