Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry
युग बीत गये हैं अब
प्रकृति, बरखा
या दर्द
सहायक सामग्री
नहीं है अब
कविता के लिये!
…अब नहीं जन्मती कविता
वियोग या संयोग से!
आजकल
फ़ेसबुकिये हो गये हैं
वाल्मीकि और तुलसीदास!
“ब्लॉगर होगा पहला कवि
पोस्ट से उपजा होगा गान!”
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
दिल की ज़मीन पर जो इक बीज पड़ गया है
हर हाल में फलेगा, ये सृष्टि का नियम है
कोई विचार मन में, आकर ठहर गया तो
जन्मों-जनम पलेगा, ये सृष्टि का नियम है
सुख-दुख के चंद पल हैं, जीवन जिसे हैं कहते
युग-युग के चक्करों में, बिन बात फँसते रहते
अज्ञानवश जो अपना गुलशन उजड़ गया है
वो ध्यान से खिलेगा, ये सृष्टि का नियम है
अन्तस् में हो गया जब, विश्वास का उजाला
अमृत बना दिया था, मीरा ने विष का प्याला
वरदान में न रखना, संकोच और शंका
विश्वास से मिलेगा, ये सृष्टि का नियम है
ये स्वर्ग-नर्क की सब, चर्चा उधार की है
जिस पर जहाँ टिका है, ताक़त विचार की है
मस्तिष्क में उपज कर, जो सोच में पला है
सच में वही घटेगा, ये सृष्टि का नियम है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
जाने क्या-क्या सह के लिक्खे
ये जो गीत विरह के लिक्खे
मेरा तो बस नाम लिखा है
तूने मुझमें रह के लिक्खे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
रेशम है कविता
झट से फिसल जाती है
उंगलियों को चूमती हुई।
थाम लेते हैं इसे
जीवन के
खुरदरे अनुभव।
दर्द रिसता तो होगा।
पीर बहती तो होगी।
कौन जाने
क्या ज़्यादा दुखदायी है
दर्द का रिसना
या रेशम का फिसलना?
…डर लगता है
गुलाबी छुअन से।
रेशम का कसता फंदा
सहला भर जाता है
खुरदरे अनुभवों को।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
नज़र की शोख़ियों को, मस्तियों को चूम आता हूँ
जे़ह्न में तैरती कुछ कश्तियों को चूम आता हूँ
ठहाकों के मुहल्ले में सजी महफ़िल से उठकर मैं
हसीं ग़ज़लों की सादा बस्तियों को चूम आता हूँ
✍️ चिराग़ जैन