Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
बिन बात आप जाने कैसे हो गए नाराज़
रामजी के काम का लिहाज भी नहीं रहा
वक़्त का स्वभाव बड़ा बेवफ़ा-सा है हुजूर
हमेशा किसी का परवाज़ भी नहीं रहा
रावण का दंभ धूल में मिला है बार बार
घर भी न रहा, राजकाज भी नहीं रहा
सच से नहीं है कोई नाता राजनीति का जी
कल भी नहीं था और आज भी नहीं रहा
✍️ चिराग़ जैन
Ref : Manoj Tiwari created a scene when someone ask him to sing a Ramayana Chaupai on stage.
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भारतीय राजनैतिक परिप्रेक्ष्य एक अस्थिर युग की ओर बढ़ रहा है। मोदी सरकार के विरुद्ध एकजुट हो रहे क्षेत्रीय दलों का उद्देश्य यदि देश का विकास करना रहा होता तो सम्भवतः आशा की किरण फूट सकती थी, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं है। शासन के लोभ में विचारधारा तक को दरकिनार कर देने वाले सत्ता-लोलुप देश और समाज का कितना भला कर सकते हैं, यह स्पष्ट है। भारत का संविधान कहता है कि धर्म के आधार पर बने किसी संगठन को राजनैतिक दल की मान्यता नहीं दी जा सकती किन्तु अंधा भी देख सकता है कि भारतीय राजनीति की धुरि धर्म, सम्प्रदाय, जाति जैसे शब्दों से ही संचालित है। यदि देश के विकास और आम नागरिक के हितों की चिंता किसी की दृष्टि में चमक उठे तो फिर जनता का समर्थन जुटाना मुश्किल न होगा। यह सत्य है कि राजनैतिक मक्कारियों और ढिठाई से इस देश का मतदाता लोकतंत्र से ऊब गया है इसीलिए राजनैतिक दलों को अपने नैतिक चरित्र में सुधार करना होगा। फुटेज कैप्चर की ड्रामेबाज़ी और जनता के हितों का नाम लेकर बहाए जा रहे मगरमच्छी आँसू बेअसर होते जा रहे हैं। सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि राजनैतिक भ्रष्टाचार और झूठ-धोखाधड़ी की ख़बरें अब जनमानस को आश्चर्यग्रस्त नहीं करतीं। यह स्थिति भारतीय लोकतंत्र के लिए भयावह है। इसी स्थिति का दुष्परिणाम है कि जंतर-मंतर पर जब अन्ना ने जनता का आह्वान किया तो पूरा देश उमड़ पड़ा। अन्ना आंदोलन भारतीय राजनैतिक रवैये को जनता का प्रत्युत्तर था। यह और बात है कि जनता में अरमानों पर पैर रखकर वह आंदोलन भी राजनीति की अट्टालिकाओं पर क़ाबिज़ हो जाने का जरिया बन कर नष्ट हो गया। हम भाजपा से दवाई मांगते हैं तो वो कहती है कि सत्तर साल से कांग्रेस ने दवाई नहीं दी। अब हम क्या चार साल में ही दवा दे दें। जाओ कुछ दिन और कोढ़ से मवाद बहने दो। कांग्रेस से दवाई मांगते हैं तो वह कहती है कि आरएसएस देश को बाँट रहा है। इसलिए पहले मोदी को हटाएंगे तब आना। फुटपाथों पर सोने वाले अभी भी छहों ऋतुएं फुटपाथ पर बिता रहे हैं। सरकार गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील में जितना रुपया फ्लैक्स प्रिंटिंग में लुटा रही है उतने से यदि फुटपाथों को छप्पर दे दिया जाता तो जनता के मन में पसरा अंधकार कुछ कम होता। सरकारी योजनाएँ मख़ौल बन कर रह गई हैं। जनता अपने भाग्य का अंधकार स्वीकार कर चुकी है। सिद्धू के पाकिस्तान दौरे पर एक सप्ताह हंगामा होता है और जनता की मूलभूत समस्याएं केरल की बाढ़ में जलसमाधि ले लेती हैं। सरकार हर साल बरसात में बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में हेलीकॉप्टर का दौरा करके वोट के बीज बिखेर आती है। नदियों का पानी ज़हर हो गया है, हम साँस लेने के लिए हवा खींचते हैं और फेफड़ों तक दमे का संचार हो जाता है। प्रश्न मोदी, राहुल, माया, अखिलेश, लालू, नीतीश, उद्धव, ओवैसी, महबूबा, केजरीवाल, ममता या अन्य किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत इच्छाशक्ति का नहीं बल्कि भारतीय राजनैतिक परिदृश्य से उठ रही सड़ांध का है। बलात्कार, लूटमार, अपहरण, ठगी, कालाबाज़ारी और भ्रष्टाचार की ख़बरें संसद की निष्ठा पर प्रश्न उठाती हैं। अराजक भीड़ कानून हाथ में लेकर लोकतंत्र की न्यायव्यवस्था को ठेंगा दिखा देती है। राजनैतिक संरक्षण के दम पर कोई भी ऐरा-ग़ैरा तंत्र को लताड़ सकता है। …क्या है ये सब? देश की जनता सोशल मीडिया की अफ़वाहों को भी गंभीरता से ले लेती है साहिबों! भावुक भारतीयों को बरगलाना बहुत आसान है। यदि यह भावुकता आपके चरित्र के विरुद्ध एकजुट हो गई तो जो स्थिति उत्पन्न होगी वह संभाली न जा सकेगी। इसलिए आपसे विनम्र निवेदन है कि जनता के हितों को अपनी वास्तविक वरीयता सूची में स्थान दीजिये, चुनाव की जीत तो झख मार के ख़ुद आपके पीछे आएगी!
✍️ चिराग़ जैन
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किसी ने मोदी जी से पूछा कि अंतरिक्ष में क्या मिलेगा?
मोदी जी बोले – ‘मेरी बातें’!
✍️ चिराग़ जैन
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सबसे पहले नोट बन्द हुए
फिर आई जीएसटी
फिर भी यदि परमात्मा ने
किसी के मन में
कमाने-खाने की हिम्मत भर दी
तो हमने उसकी दुकान सील कर दी।
दुकान बंद पड़ी है
काम चौपट है
ऐसे में पेट्रोल तिजोरी में भरेगा क्या
जब घर से निकलना ही नहीं है
तो गाड़ी में तेल डलवाकर करेगा क्या?
केंद्र में विपक्ष नहीं
राज्यों में कांग्रेस नहीं
फेसबुक लायक फेस नहीं
पीएम लायक बेस नहीं
जिसके समर्थन में सभा कर दे
वह भारी मतों से हार जाता है
सभा कांग्रेस की होती है
और भाजपाई बाज़ी मार जाता है
अब घास फूस जैसी बची कांग्रेस को भी
घूम घूम कर चरेगा क्या
जब घर से निकलना ही नहीं है
तो गाड़ी में तेल डलवाकर करेगा क्या?
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
अक्ल समय पर आ जाती, चिड़िया खेत न चुग के जाती
हाथ बँटाते सब साथी, चिड़िया खेत न चुग के जाती
जनता की चिंता से पहले ही झोली भर लेते
आज किया है जो गठबंधन वो पहले कर लेते
तो ये आफत ना आती, चिड़िया खेत न चुग के जाती
चाचा और भतीजा है गए, ईगो वाले रोगी
गैया पाली अखिलेशों ने, दूध पी गए योगी
बूआ चौकस हो जाती, चिड़िया खेत न चुग के जाती
तोप दिखी तो एक हो गए, हँसिया, तीर, कटारे
बच कर रहना आपस में ही लड़ ना बैठें सारे
इनमें पहले बन जाती, चिड़िया खेत न चुग के जाती
✍️ चिराग़ जैन