+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

अपने क़द के भीतर रहकर मिलते थे
नाराज़ों से आप सुलह कर मिलते थे
हम तो उनसे उस मुद्दत से वाकिफ़ हैं
जब वो हमको अपना कहकर मिलते थे

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!