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रक्षाबंधन

‘बंधन भी सुख का कारण हो सकता है’ – इस अद्भुत सत्य का अनोखा उदाहरण है रक्षाबंधन! यद्यपि मैं जानता हूँ कि ईश्वर ने सृष्टि के प्रत्येक प्राणी को आत्मरक्षा हेतु आत्मनिर्भर बनाया है तथापि मुझे इस बात का एहसास है कि नाड़ी पर एक धागा बांधकर मन में अपनत्व की जिस अपेक्षा...

जैन आगम की प्रासंगिकता

धर्म आत्मबल में वृद्धि करने का साधन है। साधना संहनन को सुदृढ़ करने का अभ्यास है। विपरीत परिस्थितियों में स्वयं को संयत रखने का उपाय ही व्रत है। जैन आगम का प्रथमानुयोग, जीव के इसी नैतिक विकास का आधार तैयार करता है। प्रथमानुयोग हमें संकट के समय संयत रहने के अवलम्बन...

वर्तमान गवाह है…

जिन्होंने यह कहना शुरू किया कि इस्लाम ख़तरे में है, उन्हीं के नुमाइंदों ने अफगानिस्तान पर जबरन कब्ज़ा कर लिया। यूएनओ में स्थायी सदस्यता की डींगें हाँकनेवाले देशों के लिए यह शर्मिंदगी भरी लानत है। सबसे उम्दा हथियार बनानेवाले देशों के लिए यह डूब मरने की बात है।...

प्रतिशोध का दंश

प्रतिशोध एक अंतहीन प्रक्रिया है। जाति, धर्म, सम्प्रदाय, खानदान, राजनीति, विचारधारा, देश, समाज… इन सबका सौंदर्य और सुख प्रतिशोध की इस महाज्वाला में भस्म हुआ जाता है। देवासुर संग्राम से लेकर रामायण, महाभारत और चाणक्य ही नहीं, वरन प्रत्येक संस्कृति और समाज के पास...

कोरोना में अवसर

कोरोना की दूसरी लहर बीत चुकी है, लेकिन राजनीति में ख़ुशी की लहर नहीं आई। वे अब भी आपस में लड़ रहे हैं। जब देश में कोरोना का ताण्डव चल रहा था तो पॉलिटिकल पार्टियों में इस बात पर लड़ाई थी कि ये जनता तुम्हारी है, इसे तुम बचाओ। अब जब ताण्डव शान्त हुआ है तो हर पार्टी यह...

मशहूर कविता, गुमनाम कवि

रचना और रचनाकार का सम्बन्ध पिता और सन्तति का सम्बन्ध होता है। यह किसी रचनाकार की सफलता का उत्कर्ष है कि उसकी कोई पंक्ति जनभाषा के मुहावरे में शुमार हो जाये। ‘अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो’ से लेकर ‘पोशम्पा भई पोशम्पा’ तक का हमारा बचपन ऐसी ही सौभाग्यशाली कविताओं की उंगली थामकर...
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