+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

चीनी धमकियां

इस हाथ बातचीत, उस हाथ घुसपैठ
गोल-गोल न घुमाओ सीधे-सादे सीन को
हाथ मिल जाने से न कमज़ोर मान लेना
जड़ से उखाड़ सकते हैं आस्तीन को
बड़े-बड़े कोबराओं को नचाना जानते हैं
फिर न उठाना पड़े हमें उस बीन को
भारत के वर्तमान पीएम को जान लेना
चाय में मिला के कहीं बेच न दे चीन को

✍️ चिराग़ जैन

सुशांत केस की कवरेज

मुद्दा मिल गया हाई फाई सारे चैनल लग गए
इसमें मोटी है कमाई सारे चैनल लग गए

अभी पूर्ण भी नहीं हुई है, जाँच प्रक्रिया आधी
मगर मीडिया के बुलेटिन में रिया हुई अपराधी
क्या कर लेगी सीबीआई सारे चैनल लग गए

जिसके घर में मौत हुई है उसका लाभ उठाते
नम्बर वन बनने की जिद्द में, आँसू तक बिक जाते
इनको रोको कोई भाई, सारे चैनल लग गए

मुंबई और बिहार पुलिस में तनातनी भी देखी
राजनीति ने इस चौसर पर खुलकर गोटी फेंकी
किसने रोटी नहीं पकाई, सारे चैनल लग गए

किस रिश्ते में क्या दूरी थी, मत पब्लिक में आँको
हर घर में मटियाला चूल्हा, अपना घर भी झाँको
नँगा, जिसकी पूँछ उठाई, सारे चैनल लग गए

इकनॉमी को तंत्र खा रहा, जनता को महंगाई
रोज़गार पर गाज गिरी है, इनकी सुध लो भाई
ख़बरें देती नहीं दिखाई, सारे चैनल लग गए

✍️ चिराग़ जैन

मधुबन पर बस उसका हक़ है

फूलों का सौंदर्य निरखने
बगिया में दुनिया आती है
रंग लुभाते हैं आँखों को
गंध भ्रमर को ललचाती है
लेकिन हर ललचाने वाला
सुख की घड़ियों का ग्राहक है
जड़ में जिसका लगा पसीना
इस उपवन पर उसका हक़ है

शोभा बढ़ती है उपवन की
रूप निरखने वालों से भी
फूलों का मकरंद निखरता
उसको चखने वालों से भी
लेकिन मधुबन उसका होगा
जो ये फूल उगाने आया
तुम सब खिल जाने पर आए
पर वो इन्हें खिलाने आया
तुम उत्सव के अभिनेता हो
वो संघर्षों का नायक है
जिसने सींचे हैं सब पौधे
बस मधुबन पर उसका हक़ है

मंदिर-मंदिर द्वारे-द्वारे
तुमने केवल हाथ पसारे
ईश्वर के व्यापारी बोलें-
ईश्वर हैं क्या सिर्फ़ तुम्हारे?
पूजक बनकर तुमने केवल
इच्छाओं का भार दिया है
छैनी ने आकार दिया है
शब्दों ने विस्तार दिया है
देवालय में मूरत रखकर
शीश झुकाने वाले सुन लें
जिसने रूप गढ़ा मूरत का
बस भगवन पर उसका हक़ है

धरती उनकी है, जो आए
तिनका-तिनका नीड़ बनाने
उनका क्या जो निकल पड़े हैं
ध्वंस मचाती भीड़ बनाने
जो लालच से अभिप्रेरित है
उसका कुछ अधिकार नहीं है
विक्रेता, सर्जक से ऊँचा!
जीवन है, बाज़ार नहीं है
कंस, कालिया सबने केवल
गोकुल का दोहन करना था
जिसने वंशी के स्वर घोले
वृंदावन पर उसका हक़ है

✍️ चिराग़ जैन

राह के काँटे चुभेंगे

बो रहे हो इस चमन में नागफनियाँ
जिस्म होंगे देखना घायल तुम्हारे
दूब के कोमल गलीचे मत उखाड़ो
पाँव सहलाती मिलेगी कल तुम्हारे

जब तुम्हारी राह के अनुयायियों को
नागफनियों की चुभन से ऊब होगी
राह के काँटे चुभेंगे पीढ़ियों को
तब सभी का पथ हमारी दूब होगी
सिर्फ कोमलता तुम्हारा साथ देगी
क्रूरता उलझाएगी आँचल तुम्हारे

आज जो तुम ताल में विष डालते हो
वह तुम्हारे वंश को पीना पड़ेगा
कल तुम्हारे नौनिहालों को विवश हो
आज के इस दंश को जीना पड़ेगा
कल तुम्हारे अंश को ठगते फिरेंगे
आज के छोड़े हुए ये छल तुम्हारे

आज जिसके ताप से तुम जल रहे हो
वह तुम्हारे ही किसी कल की लपट है
आज जो प्रतिशोध बनकर सामने है
वह तुम्हारे पूर्ववर्ती का कपट है
तुम सुबह की लालिमा में ये न भूलो
कालिमा के दास अस्ताचल तुम्हारे

रोक दो प्रतिशोध की अब ये लड़ाई
ये तुम्हारी पीढ़ियों को पाट देगी
आज तुम दीवार तोड़ोगे जड़ों से
कल कोई बुनियाद तुमको काट देगी
आज जंगल में शहर को घेर लोगे
कल शहर खा जाएंगे जंगल तुम्हारे

✍️ चिराग़ जैन

न्याय की व्यवस्था

यदि सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा तो
चैनलों पे रोज़ तीन-पाँच कौन करेेगा
पुलिस वुलिस सब ठीक काम कर लें तो
बड़े-बड़े झूठ भला साँच कौन करेगा
न्याय की व्यवस्था संविधान में करी है ऐसी
अब भला साँच पर आँच कौन करेगा
पैंसठ दिनों में बस इतना पता चला है
एक्टर के मामले की जाँच कौन करेगा

✍️ चिराग़ जैन

संदर्भ: सुशांत सिंह राजपूत के मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई

गड़बड़ है विपक्ष में

अपनी ही बात को उठाने से क्यों चूकते हैं
ऐसा कैसा शासन का डर है विपक्ष में
शासन को छोड़ कर आपस में लड़ते हैं
किसी भूत-प्रेत का असर है विपक्ष में
दुखती हुई क्या कोई रग सी दबी हुई है
नाम सुनते ही थर-थर है विपक्ष में
मुद्दों पे सही से बात करने से बचते हैं
लगता है कोई गड़बड़ है विपक्ष में

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!