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देव-शास्त्र-गुरु

ज्ञानसिंधु वीतरागी हित-उपदेषी हैं जो
ता की करो पूजा नित प्रति अष्ट द्रव्य से
पंच-महाव्रतों का जो बाना पहन के चलें
ऐसे गुरुओं की सेवा करो जीव भव्य रे
जिन की जो वाणी जिनवाणी का मनन करो
संयम का पालन बनाओ बस लक्ष्य रे
व्रत-उपवास करो नितप्रति दान करो
तब ही चिराग कहलाओगे सुसभ्य रे
✍️ चिराग़ जैन

महावीर

क्षमा को भुलाओ नहीं मति भरमाओ नहीं
घाव को कुरेदोगे तो ख़ून बह जाएगा
जो हुआ सो भूल जाओ आज में सुधार लाओ
निज को संवारे वही वीर कहलाएगा
अम्बर को छोड़ के दिगम्बर को ओढ़ ले तो
धन्य तेरी जननी का क्षीर कहलाएगा
समता का भाव धरे काऊ से ना राग करे
तब ही ‘चिराग’ महावीर कहलाएगा
✍️ चिराग़ जैन

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