Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
हम मुहब्बत का अंदाज़ा करेंगे
वो हिमाक़त का अंदाज़ा करेंगे
जब तलक दूरियाँ न हों शामिल
कैसे चाहत का अंदाज़ा करेंगे
आदमी को समझ न पाए जो
क्या वो क़ुदरत का अंदाज़ा करेंगे
दौरे-ग़म में कहे कोई कुछ भी
सब नसीहत का अंदाज़ा करेंगे
आदमी ज़िब्ह करने वाले ही
आदमीयत का अंदाज़ा करेंगे
ख़ुद ही आफ़त बुलाएंगे और फिर
ख़ुद ही राहत का अंदाज़ा करेंगे
जब भी बेबाक़ सच कहेंगे हम
वो बग़ावत का अंदाज़ा करेंगे
हम तो अपना समझ के कह देंगे
सब तिज़ारत का अंदाज़ा करेंगे
लोग मेरी हरेक हरक़त से
मिरी फितरत का अंदाज़ा करेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
किसी पत्थर से जब तूने ये हाले-दिल कहा होगा
तेरी आँखों से बरबस दर्द का सागर बहा होगा
मेरे दिल ने भी पीड़ा को हज़ारों बार झेला है
मुझे अहसास है तूने वो ग़म कैसे सहा होगा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
मस्त था मैं, भ्रमर-सा दीवाना था मैं, लेखनी प्रेयसी बन गई थी मेरी
ऑंसुओं की अमानत संजोई बहुत, जुल्म से जंग-सी ठन गई थी मेरी
एक दिन प्रेयसी मुझसे कहने लगी- “मेरे प्रीतम ये क्या कर दिया आपने
मेरे बचपन को क्यों रक्त-रंजित किया, मांग में रक्त क्यों भर दिया आपने
क्यों शवों के नगर में मुझे लाए हो, मेरी मासूमियत तुमने देखी नहीं
घात-आघात की बात करते सदा, तुमने यौवन की लाली समेटी नहीं
शोक विधवा का, पीड़ा जगत् की दिखी; मेरे दिल के ज़ख़म ना दिखे आपको
सारी दुनिया के ऑंसू समन्दर लगे, मेरे ऑंसू सनम ना दिखे आपको
मेरे भीतर ज़रा झाँक कर देख लो, प्यार के गीत बनते चले जाएंगे
मेरे ऑंचल से ऑंसू अगर पोंछ लो, सब समन्दर सिमटते चले जाएंगे”
मैं रहा मौन, मन ने मगर ये कहा- “तेरे बचपन को मैंने क़तल कर दिया
तुझको खूँ से रंगा हर पहर, हर घड़ी, तुझको यौवन से भी बेदख़ल कर दिया
जब कभी तेरे यौवन पे लाली चढ़ी, मुझको बेवाओं की मांग दिखने लगीं
जब कभी तेरे ऑंचल में मोती जड़े, दिल में भूखी निगाहें सिसकने लगीं
तेरी मासूमियत कैसे देख्रू भला, भूखे बच्चे बिलखते नज़र आ रहे
ऐसे मौसम में क्या प्यार को शब्द दूं, जब ग़रीबों के बच्चे ज़हर खा रहे
क़ातिलों के शहर में खड़ा है कवि, हर तरफ़ मौत का घर नज़र आएगा
प्यार का गीत कैसे लिखेगा कोई, प्यार भी मौत की भेंट चढ़ जाएगा!”
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Poetry, Unpublished
महावीर स्वामी बनें तेरे अनुगामी; सारी
दुनिया के प्र्राणी नाथ ऐसा वर दीजिए
बंद हो समर बहे प्रेम-निर्झर; मिटे
चेहरों से डर कुछ ऐसा कर दीजिए
आसुरी प्र्रयास पर बाँसुरी विजयी बने
अधरों पे मीठी मुस्कान धर दीजिए
पाँच अणुव्रत, दश धर्मों की गूँज उठे
भारत को फिर से महान कर दीजिए
त्रिशला के लाल तेरा कैसा है कमाल; नहीं
तन पे रुमाल फिर भी तू महाराज है
जीत लिया काल, काट कर्मों का जाल; नोच
दिए सब बाल तेरे वीरता के काज हैं
तप का धमाल तेरे त्याग का धमाल; तेरी
सधी हुई चाल तेरा दुनिया पे राज है
धरती निहाल तो पे आसमां निहाल; सारी
जगती निहाल तू त्रिलोक सरताज है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Poetry, Unpublished
काली अमावस का अंधेरा होम करने को,
दीवाली के दीप सामधेनी बन जाएंगे
पीड़ा वाली ज्वालाएँ जहाँ प्रचण्ड होंगी, वहाँ
शांति-धार बरसाने प्रेम-घन जाएंगे
बलिदान हुए यदि कहीं तेरे लाडले तो
अरथी सजाने केसरी-सुमन जाएंगे
पर यदि तलवार चली रणबाँकुरों की,
शत्रुओं के शीश तेरी ही शरण आएंगे
चाहे कितने भी हथियार वे बटोर लाएँ,
लूट नहीं सकते हैं तेरी आन-बान माँ
बार-बार तूने घूँट कड़वे पिए हैं पर
अब नहीं करना पड़ेगा विषपान माँ
ऑंख भी उठाई यदि पापियों ने तेरी ओर,
कम पड़ जाएंगे कफ़न वाले थान माँ
दुष्ट असुरों का सर्वनाश करने के लिए
परमाणु-बमों का करेंगे संधान माँ
लाज तेरे पावन किरीट की बचाने हेतु
कर में किरिच औ त्रिशूल धर लेंगे हम
चामरों की सौम्य पवन का जिन्हें ज्ञान नहीं,
उन्हें समझाने को प्रलय-समर देंगे हम
अब नहीं तृषित रहेगी देवी रणचंडी,
शत्रुओं के श्रोणित से घट भर देंगे हम
सुमनों की क्या बिसात; माता भेंट में तू आज
मांग के तो देख दुश्मनों के सर देंगे हम
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Poetry
राष्ट्र के निमित्त बलिदान कैसे करते हैं
भामाशाह वाली वो कहानी मत भूलना
आस्था के बल से जो कर्मों से जीत गई
महासती मैना जैसी रानी मत भूलना
सत्य के लिए जिन्होंने प्राण तक त्याग दिए
अकलंक जैसे महादानी मत भूलना
राजुल ने जहाँ धोई मेहंदी सुहागवाली
गिरनार का वो लाल पानी मत भूलना
जियो और जीने दो की बात करते हैं हम
कहीं और ऐसा उपदेश नहीं मिलता
मृत्यु के क्षणों को भी महोत्सव-सा मानते हैं
धरती पे ऐसा परिवेश नहीं मिलता
सारा सुख-वैभव जो जीत के भी त्याग आये
ऐसा कोई और गोमटेश नहीं मिलता
तप-त्याग से यहाँ परमपद मिलते हैं
हाथी-घोड़े वालों को प्रवेश नहीं मिलता
पंथ हैं अनेक जिनमत में भले ही पर
मोक्षमार्ग वाला सुविचार बस एक है
सैंकड़ों हों वाद औ विवाद किंतु सत्य है कि
अहिंसा पे सबका विचार बस एक है
मान्यताएं सबकी भले हीं हों विभिन्न किन्तु
पाँच पदवाला नवकार बस एक है
कैसे नरकों से निर्वाण पहुँचेगा जीव
पूरे जिन-आगम का सार बस एक है
जैन वो नहीं कि बस नाम में लिखा हो जैन
जैन वो है जिसके विचार जैन हो गए
जाति भले कोई भी हो, आप जैन ही रहेंगे
आत्मा के यदि संस्कार जैन हो गए
जीवदया और शाकाहार के हैं प्रतिबिंब
सत्य औ अहिंसा के आधार जैन हो गए
किन्तु मातृभूमि पे पड़ा है कभी संकट तो
ख़ुशी-ख़ुशी राष्ट्र पे निसार जैन हो गए
✍️ चिराग़ जैन