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मुक़म्मल क़लाम

सभी ग़मों को ग़ज़ल का मुकाम देता है
ख़ुदा सभी को कहाँ ये इनाम देता है
वो जिसकी एक-एक साँस जैसे मिसरा हो
वही जहाँ को मुक़म्मल क़लाम देता है

✍️ चिराग़ जैन

हक़ीक़त

सितम का दर्द होता है बहुत गहरा नहीं छिपता
मेरी नज़रों से आँसू का कोई क़तरा नहीं छिपता
किसी के होंठ कितनी भी अदाकारी करें लेकिन
बनावट से हक़ीकत का कभी चेहरा नहीं छिपता

✍️ चिराग़ जैन

मैं शायर नहीं होता

मुहब्बत के बिना अहसास से दिल तर नहीं होता
अगर अहसास न हो तो सुख़न बेहतर नहीं होता
मेरी पहचान है ये शायरी, ये गीत, ये ग़ज़लें
किसी से प्यार न करता तो मैं शायर नहीं होता

✍️ चिराग़ जैन

ज़रूरत

मेरी बेबस मुहब्बत को सहारों की ज़रूरत है
दीवाने को महज तेरे इशारों की ज़रूरत है
मेरा दिल क़ैद करने को तेरी ज़ुल्फ़ें ही काफी हैं
न तीरों की ज़रूरत है न तारों की ज़रूरत है

✍️ चिराग़ जैन

मर्यादा

न हों हदों में तो छाले रिसाव देते हैं
किनारे धार को बाढब बहाव देते हैं
हदों में हैं तो ख़ैर-ख्वाह हैं उंगलियों के
हदों को लांघ के नाखून घाव देते हैं

✍️ चिराग़ जैन

किसी के बिन…

भीतर-भीतर मन गलता है बाहर नैन बरसते हैं
बीते पल आँखों के आगे हर पल हलचल करते हैं
टूटन, आह, चुभन, सिसकन में जीवन घुलता जाता है
लोग किसी के बिन जी लेना कितना सहज समझते हैं

✍️ चिराग़ जैन

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