Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Hasya Kavita, Poetry
मुम्बई में जुहू-चौपाटी पे शाम सात बजे
बाद; परिवार संग नहीं जाना चाहिए
आगरे में बालकों को ताज और प्रेमिका को
पालिवाल गार्डन में घुमाना चाहिए
बैंगलोर वाले लाल बाग़ जैसा कोई एक
प्रेमियों को देश भर में ठिकाना चाहिए
जहाँ पहले हैं, वहाँ और सुविधाएँ मिलें
जहाँ पे नहीं हैं वहाँ बन जाना चाहिए
आशिक़ों को आशिक़ी में डूबने के लिए
जोधपुर वाला एक लेक कायलाना चाहिए
सांझ वाला सत्संग करने के लिए
हर शहर में एक तीरथ बनाना चाहिए
ऐसे लोकप्रिय तीरथों के निर्माण हेतु
सरकार को भी अब आगे आना चाहिए
मानव प्रजाति वाले तोते-तोतियों के लिए
भी तो कोई बर्ड सेंचुरी बनाना चाहिए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
एक पल सूरज छिपा और फिर उजाला हो गया
लेकिन इसमें चांद का किरदार काला हो गया
साज़िशें सूरज निगलने की रची थीं चांद ने
पर वो अपनी साज़िशों का ख़ुद निवाला हो गया
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta
हाँ, गुज़ारे थे कभी दो-तीन पल
कुछ हसीं, कुछ शोख़, कुछ रंगीन पल
हर तरह की वासना से हीन पल
अब कहाँ मिलते हैं वो शालीन पल
भोग, लिप्सा, मोह के संगीन पल
कब किसे दे पाए हैं तस्कीन पल
आपका आना, ठहरना, लौटना
इक मुक़म्मल हादसा थे तीन पल
साथ हो तुम तो मुझे लगता है ज्यों
हो गए हैं सब मिरे आधीन पल
कँपकँपाते होंठ, ऑंखों में हया
किस तरह भूलेंगे ये रंगीन पल
दिल में रोशन रख उमीदों के ‘चिराग़’
छू न पाएंगे तुझे ग़मगीन पल
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
हो गई है ज़िन्दगी अपनी सितारों की तरह
देखते हैं लोग भी अब तो नज़ारों की तरह
जो चले थे काम करने कामगारों की तरह
वो उनींदे से खड़े हैं अब कतारों की तरह
सब शिकारी की तरह घर से निकलते हैं मगर
सब फँसे मिलते शिकंजे में शिकारों की तरह
आपके हालात की बेइंतहा मज़बूरियाँ
और मेरे दहकते अरमां अंगारों की तरह
हर ग़ज़ल मानी बदल लेती है मौक़ा देखकर
शेर हैं सब बेवफ़ाओं के इशारों की तरह
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
लड़खड़ाकर गिरे नहीं होते
गर तेरे आसरे नहीं होते
कमनसीबी का दौर है वरना
हम भी इतने बुरे नहीं होते
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
दर्द की दास्तान सुन लेना
ख़ुद-ब-ख़ुद साहिबान सुन लेना
होंठ मेरे न कुछ कहेंगे मगर
आँसुओं का बयान सुन लेना
✍️ चिराग़ जैन