क़ामयाबी की आस्तीनों में
क़ामयाबी की आस्तीनों में
मेरी शोहरत से जल गए दुश्मन
दोस्तों में बदल गए दुश्मन
क़ामयाबी की आस्तीनों में
हाय धोखे से पल गए दुश्मन
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
क़ामयाबी की आस्तीनों में
मेरी शोहरत से जल गए दुश्मन
दोस्तों में बदल गए दुश्मन
क़ामयाबी की आस्तीनों में
हाय धोखे से पल गए दुश्मन
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
इतनी सारी व्यस्तताओं के बीच
निकाल ही लेता हूँ
कुछ लम्हे
कविता लिखने के लिए।
बहुत सारी
अधलिखी कविताओं को छोड़
चुरा ही लाता हूँ कुछ पल
तुमसे बतियाने के लिए।
अक्सर पूछ बैठता हूँ ख़ुद से
क्या मिलता है मुझे
कविता लिखने से?
क्या हासिल होता है
तुमसे बतियाने से?
अच्छा लगता है
…यही ना!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
गहराई में जाकर बिल्कुल चुप हो जाती हैं
और किनारे आकर लहरें शोर मचाती हैं
लहरें पल भर में जीवन का सार बताती हैं
जिसमें से उठती हैं उस में ही मिल जाती हैं
जब उस अनुपम प्रथम मिलन की यादें आती हैं
नम होते हैं अधर और पलकें मुस्काती हैं
साहिल केवल कचरा ही देता है सागर को
फिर भी लहरें साहिल को मोती दे जाती हैं
मैं तो भावों और शब्दों में उलझा रहता हूँ
पर उनसे जुड़कर ग़ज़लें पावन हो जाती हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Prose, Quotation, Unpublished
विवाद होने से अधिक निराशाजनक है, व्यवहार समाप्त हो जाना!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
ख़ुद अन्धेरे में रहकर ही
प्रकाशित करता है औरों को
…कैमरा।
लेकिन जैसे ही कोई किरण
रौशन करने आती है
कैमरे को…
…तो इसे
अंधियारी लगने लगती है
सारी दुनिया।
बिल्कुल इंसान की तरह है
कैमरा भी
…ओछा कहीं का!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Prose, Quotation, Unpublished
एक ख़बर- वाराणसी में गंगा आरती के दौरान बम धमाका!
टिप्पणी- कभी दीवाली मनाई हो तो पता चले, लक्ष्मी पूजन के समय आतिशबाज़ी नहीं की जाती।
✍️ चिराग़ जैन
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