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मोदी… मोदी…

मोदी जी नेपाल गए। लोगों ने नारे लगाए -“मोदी …मोदी।” मोदी जी प्रसन्न हुए। मोदी जी अमरीका गए। लोगों ने नारे लगाए- “मोदी …मोदी।” मोदी जी आत्मविश्वासी हो गए। मोदी जी जापान गए। लोगों ने नारे लगाए- “मोदी ..मोदी।” मोदी जी बेबाक़ हो गए। मोदी जी चीन गए। लोगों ने नारे लगाए- “मोदी ….मोदी।” मोदी जी ने विपक्षियों की बातें सुननी बंद कर दीं। मोदी जी जर्मनी गए। लोगों ने नारे लगाए- “मोदी …मोदी। मोदी जी ने सबकी बात सुननी बंद कर दी।
मोदी जी कश्मीर में परास्त हुए। लेकिन कानों में गूँजता रहा- “मोदी …मोदी।” मोदी जी दिल्ली हार गए। लेकिन कानों में गूँजता रहा- “मोदी …मोदी। मोदी जी बिहार में हारे तो भ्रम टूटा। चेहरा उतर गया। कान सुन्न हो गए। उनको आडवाणी जी की आवाज़ सुनाई दी। जोशी जी की बात पर उनका ध्यान गया। लेकिन आज मोदी जी ब्रिटेन पहुँच गए। लोगों ने फिर नारे लगाए- “मोदी… मोदी।” तभी मोबाईल पर किसी हितचिंतक ने फोन करके कहा- “भारत में आपकी लोकप्रियता कम हुई है।” मोदी जी ने ज़ोरदार अट्टहास किया। मोबाइल को हिक़ारत से स्विच ऑफ़ किया। और हाथ हिलाते हुए उनका अभिवादन करने लगे जो नारे लगा रहे थे- “मोदी …मोदी।”
✍️ चिराग़ जैन

उजियारे के अवशेष

गाँव का
पुराना मकान
कच्चा-पक्का फ़र्श
दीमक लगी जर्जर चौखट
और
देहरी के दोनों ओर
चिकनाई के
दो गोल निशान!मुद्दत हुई
हर साल
दीपावली पर
दीपक जलाते थे दो हाथ।

फिर
अपने पल्लू की ओट में छिपाकर
हवा के झोंके से बचाते हुए
दीवार की आड़ में
हौले से
देहरी पर
दो दीपक
धर आते थे दो हाथ।

न जाने क्यों
आज फिर से
जीवंत हो उठी है माँ!

✍️ चिराग़ जैन

विज्ञापन से पता चला

विज्ञापन से पता चला कि खली की अपनी बॉडी से उनका अपना घर टूट गया। उनको अपने अवार्ड वापस कर देने चाहिए थे। लेकिन उन्होंने अवॉर्ड वापस करने की बजाय अपनी मौसी से सलाह ली। अब वो अम्बुजा सीमेंट से घर बणवा के आराम से रह रहे हैं।
मुझे समझ नहीं आता कि इन सब पुरस्कार विजेताओं की कोई मौसी क्यों नहीं है।

✍️ चिराग़ जैन

मार्च फॉर इण्डिया

राहुल गांधी ने मम्मी से पूछा है- “मम्मी मम्मी! बीजेपी ‘मार्च फॉर इण्डिया’ कर रही है तो आप ‘अप्रैल फॉर इटली’ क्यों नहीं करती?”
मम्मी माथा ठोकते हुए बोली- “मार्च-अप्रैल का तो पता नहीं पर तू एक दिन ‘श्राद्ध फॉर कांग्रेस’ ज़रूर करेगा।”

✍️ चिराग़ जैन

इसे कहते हैं बाज़ी

सियासत के एक खेमे ने कुछ कलाकारों को बटोरा …सरकार का विरोध करने के लिए।
फिर सियासत के दूसरे खेमे ने कुछ कलाकारों को बटोरा …कलाकारों का विरोध करने के लिए।
अब कुछ दिन हो-हल्ला होगा।
एक खेमे के कलाकार दूसरे खेमे के कलाकारों को गालियाँ देंगे। खूब शोर होगा। सोशल मीडिया पर खेमेबाज़ी होगी। जब माहौल खूब बिगड़ लेगा तो एक दिन टीवी चैनल पर दो बड़े दलों के राजनेता दुखी होते हुए बयान देंगे – “हमें बहुत दुःख है कि साहित्य और कला के क्षेत्र से जुड़े लोग आपस में इस तरह लड़ते-मरते हैं। अरे भाई! तुम कलाकार हो, सृजन करो, कविता लिखो, मनोरंजनकरो। राजनीति करना आपको शोभा नहीं देता।”

✍️ चिराग़ जैन

धनतेरस का दीया

‘सुन!
धनतेरस का दीया
जोड़ रही हूँ।
ध्यान रखियो
बाहर मत आइयो।’

-कहते हुए
हर साल
धनतेरस पर
दीपक बालती थी माँ।

अगली सुबह
चुरा लेता था मैं
उस दीये के
तेल में भीगा रुपैया।

‘क्यों रे
ये दीये में से
सवाया किसने उठाया’

‘मुझे नहीं पता मम्मी
मैंने तो
दीया ही नहीं देखा
आपने ही तो कहा था
अंदर रहने को।’

मेरा धनतेरस तो
शुभ ही रहता था
लेकिन
माथे में त्यौरियाँ डाले
देर तक
बड़बड़ाती थी माँ!

आज दीवाली के लिए
फूल लेने बाहर निकला
किसी की चैखट पर
दीया रखा था
धनतेरस का
पाँच रुपैये भी थे उसमें
तेल में भीगे हुए।

…किसी ने
चुराए ही नहीं अब तक।

जी तो बहुत किया
चुराने का
लेकिन छोड़ आया
…उस बड़बड़ को मिस करूंगा!

✍️ चिराग़ जैन

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