+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

ज़िन्दगी

दुनिया में आ के सकुचाई पल भर फिर
ममता की छाँव में सँवर गई ज़िन्दगी
पालना, खिलौना, पाठशाला, अनुभव, ज्ञान
प्रेम की छुअन से निखर गई ज़िन्दगी
क़ामयाबी का गुमान ज़िन्दगी पे लदा और
ज़िन्दगी के दाता को अखर गई ज़िन्दगी
मौत की हवा ने श्वास का दीया बुझा दिया तो
हाड़-हाड़ राख में बिखर गई ज़िन्दगी
✍️ चिराग़ जैन

सार्थकता

सच बोलने की भी जो हिम्मत जुटा न सके
ऐसी निरी खोखली जवानी किस काम की
शोषण को देख नहीं लहू में उबाल आए
बोलो ऐसी ख़ून की रवानी किस काम की
लाज, प्रेम, करुणा की नमी यदि सूख जाए
भला फिर आँख बिन पानी किस काम की
जिसके निधन पे न चार नैन नम हुए
ऐसे आदमी की ज़िन्दगानी किस काम की

✍️ चिराग़ जैन

काव्य

जिन शिखरों को हो पिघलने से ऐतराज़
उन्हें कभी नदी-सा बहाव नहीं मिलता
अनुभूति अनकही रहती हैं जब तक
अक्षरों से उनका स्वभाव नहीं मिलता
जोड़-तोड़ करने से कविता तो बनती है
किन्तु ऐसी कविता में भाव नहीं मिलता
काव्य तो है ऐसी पीड़ाओं की प्रतिध्वनि जहाँ
टीस उठती है पर घाव नहीं मिलता

✍️ चिराग़ जैन

प्यार भर देंगे

तेरे दामन में प्यार भर देंगे
तेरे मन में शृंगार भर देंगे
कब तलक तू हमें न चाहेगा
ख़ुद को तुझ पर निसार कर देंगे

✍️ चिराग़ जैन

होली

सबके जीवन में भरें पावनता के रंग
ऐसी रंगत लाए अब, होरी अपने संग

अब ऐसे मनने लगा, होली का त्यौहार
चेहरे स्याह-सफेद हैं, रंगे हुए अख़बार

भूले से भी मत करो, पॉवर का मिस-यूज़
भस्म हो गई होलिका, उड़ा पाप का फ्यूज़

✍️ चिराग़ जैन

मेहमानों का आना-जाना

वो, जिनके घर मेहमानों का आना-जाना होता है
उनको घर का हर कमरा, हर रोज़ सजाना होता है
जिस देहरी की किस्मत में स्वागत या वंदनवार न हो
उस चौखट के भीतर केवल इक तहख़ाना होता है

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!