अंतरिक्ष में क्या मिलेगा
किसी ने मोदी जी से पूछा कि अंतरिक्ष में क्या मिलेगा?
मोदी जी बोले – ‘मेरी बातें’!
✍️ चिराग़ जैन
किसी ने मोदी जी से पूछा कि अंतरिक्ष में क्या मिलेगा?
मोदी जी बोले – ‘मेरी बातें’!
✍️ चिराग़ जैन
पाक की सियासत क़माल की सियासत है
सबकी बनाती है ये रेल, चले जाओगे
फाँसी, गोली, क़ैद, सज़ा यही मिलता है बस
निकलेगा आपका भी तेल चले जाओगे
खेल-खिलवाड़ नहीं ज़िन्दगी का दांव है ये
कस ली है नाक में नकेल चले जाओगे
कुछ रोज़ महलों का रंग ढंग देख लो जी
बाद में तो आप ख़ुद जेल चले जाओगे
भारत के वीर सैनिकों से सामना है अब
साज़िशें करीं तो नींबू से निचुड़ जाओगे
ज़्यादा फूल कर कोई भूल मत कर देना
इन्हें क्रोध आया तो वहीं सिकुड़ जाओगे
सैनिकों के साथ यदि मैच खेलने लगे तो
एक झटके में सबसे बिछुड़ जाओगे
बॉल छोड़ दी तो पाकिस्तान में धमाका होगा
बल्ले पे जो ली तो ख़ुद आप उड़ जाओगे
भारत से भूल के मुकाबला न कीजियेगा
आपके पीएम को दबोच लेंगे मोदी जी
आप जब तक शुरुआत भी नहीं करोगे
तब तक अंत को भी सोच लेंगे मोदी जी
लच्छेदार बातों के भरोसे मत रहिएगा
ताकते रहोगे ऐसी लोच लेंगे मोदी जी
नए पंछियों को कहिए कि घोंसले में रहें
उड़ने लगे तो पर नोच लेंगे मोदी जी
भारत की संसद की नींव न डिगा सकोगे
जनता को अभी संविधान पे भरोसा है
भूख के सवाल का जवाब खोज लेंगे हम
भारत को अपने किसान पे भरोसा है
आपस का सारा मतभेद भूल जाएंगे जी
राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान पे भरोसा है
दुश्मनों की साज़िशों से डरते नहीं हैं क्योंकि
सीमाओं पे जूझते जवान पे भरोसा है
✍️ चिराग़ जैन
सूरज आग उगलता हो
सिर पर मेघ मचलता हो
भीषण कोहरा पड़ता हो
अम्बर दिन भर जलता हो
हर मुश्किल को झेल गए हम मेहनत की तलवार से
हमें कष्ट होता है केवल शासन के व्यवहार से
मिट्टी सख्त हुई तो हम भी कंधे पर हल धर लाए
नाखूनों से नहर काट कर खेतों तक कलकल लाए
ओले बरसे नहीं हटे
पारा उछला वहीं डटे
आंधी आई अड़े रहे
जमा हुए हम नहीं घटे
हम हरदम बढ़कर जूझे है हर इक पारावार से
हमें कष्ट होता है केवल शासन के व्यवहार से
सूखी रोटी खाकर भी हम रह लेते खुशहाली में
कई पीढियां बीत गई हैं ऐसी ही कंगाली में
भीतर कितने शूल गए
जीवन का सुख भूल गए
बिटिया बिन ब्याही बैठी
बापू फाँसी झूल गए
दर्द हमारा आकर देखो, मत पूछो अखबार से
हमें कष्ट होता है केवल शासन के व्यवहार से
यही एक उम्मीद रखी है संसद के रखवालों से
बाजारों को मुक्त करा दो, चोरों और दलालों से
शासन सुख से सोता है
लहसुन धीरज खोता है
गन्ना सूखे खड़े-खड़े
प्याज आँख भर रोता है
श्रम को उसका मोल मिलेय इतना मांगा सरकार से
हमें कष्ट होता है केवल शासन के व्यवहार से
✍️ चिराग़ जैन
सबसे पहले नोट बन्द हुए
फिर आई जीएसटी
फिर भी यदि परमात्मा ने
किसी के मन में
कमाने-खाने की हिम्मत भर दी
तो हमने उसकी दुकान सील कर दी।
दुकान बंद पड़ी है
काम चौपट है
ऐसे में पेट्रोल तिजोरी में भरेगा क्या
जब घर से निकलना ही नहीं है
तो गाड़ी में तेल डलवाकर करेगा क्या?
केंद्र में विपक्ष नहीं
राज्यों में कांग्रेस नहीं
फेसबुक लायक फेस नहीं
पीएम लायक बेस नहीं
जिसके समर्थन में सभा कर दे
वह भारी मतों से हार जाता है
सभा कांग्रेस की होती है
और भाजपाई बाज़ी मार जाता है
अब घास फूस जैसी बची कांग्रेस को भी
घूम घूम कर चरेगा क्या
जब घर से निकलना ही नहीं है
तो गाड़ी में तेल डलवाकर करेगा क्या?
✍️ चिराग़ जैन
देश को सँवारने के क़ीमती ये दिन-रात
आप क्यों विपक्ष की नकेल में लुटा रहे
जनता के हाथों में से छीन के पुराने नोट
नए-नए नोट अब तेल में लुटा रहे
पार्टी को अरबों का दान जो मिला हुज़ूर
हाय उसे खच्चरों की सेल में लुटा रहे
थोक के व्यापार में कमाई हुई साख काहे
हर दो महीने में रिटेल में लुटा रहे
गाड़ी में नहीं है तेल, रोड पे नहीं है गाड़ी
इसलिए अब रोडरेज कम हो गया
लूटपाट की भी ख़बरों में कमी आ गई है
लॉन्ग ड्राइविंग वाला क्रेज कम हो गया
सड़कों के जाम से मुहाल था सफ़र अब
तेल के हुए जो दाम तेज, कम हो गया
बहुओं को फूंकने की हैसियत ही नहीं है
इसलिए ब्याह में दहेज कम हो गया
✍️ चिराग़ जैन
अक्ल समय पर आ जाती, चिड़िया खेत न चुग के जाती
हाथ बँटाते सब साथी, चिड़िया खेत न चुग के जाती
जनता की चिंता से पहले ही झोली भर लेते
आज किया है जो गठबंधन वो पहले कर लेते
तो ये आफत ना आती, चिड़िया खेत न चुग के जाती
चाचा और भतीजा है गए, ईगो वाले रोगी
गैया पाली अखिलेशों ने, दूध पी गए योगी
बूआ चौकस हो जाती, चिड़िया खेत न चुग के जाती
तोप दिखी तो एक हो गए, हँसिया, तीर, कटारे
बच कर रहना आपस में ही लड़ ना बैठें सारे
इनमें पहले बन जाती, चिड़िया खेत न चुग के जाती
✍️ चिराग़ जैन