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पाप

सिर्फ़ मतलब के लिए हर चाल चलना पाप है हर दफ़ा दर देखकर मजहब बदलना पाप है शाइरी, दीवानगी, नेकी, इबादत, मयक़शी और राहे-इश्क़ में गिर कर संभलना पाप है काश बच्चों की तरह हालात भी ये जान लें ख़्वाहिशों की तितलियों के पर मसलना पाप है दौर इक ऐसा भी था, जब झूठ कहना मौत था और अब...

रामसेतु

इन नासमझों का होगा नहीं रे कल्याण रामधरा पर मांग रहे हैं रामलला के प्रमाण श्रीराम बसे हैं आंगन में, पावन तुलसी की क्यारी में श्री राम बसे हैं घर-घर में, आपस की दुनियादारी में श्रीराम हमारी आँखों में, श्रीराम हमारे सपनों में श्रीराम हैं सारे संबंधों में, सब रिश्तों...

रिश्तों को ज़िंदा रखना

कितना आसान है रिश्तों को फ़ना कर देना ज़रा-सी बात को दिल से लगा के रख लेना ग़ैर लोगों को, रक़ीबों को तवज़्ज़ो देना शक़ की तलवार से विश्वास को कर देना हलाल अपने लहजे को तल्ख़ियों के हवाले करना अपने मनसूबों में कर लेना सियासत को शुमार सामने वाले की हर बात ग़लत ठहराना उस की हर एक...

ख़ुद से मुख़ातिब

कितना आसान है दुनिया को ग़लत ठहराना थोड़ा चालाक रवैया ज़रा-सी अय्यारी झूठ को सच बना देने का क़रामाती गुर थोड़ी कज़बहसी थोड़ी ज़िद्द ज़रा-सी लफ़्फ़ाज़ी तेज़ आवाज़ औ’ मुद्दों को घुमाने का हुनर चन्द सिक्कों से ख़रीदे हुए दो-चार गवाह और इक इन्तहा बेअदबी की ढिठाई की…. ….कितना...

अंतर्मुखी

ख़ुशी की लाश उठती है ख़ुशी की चाह के नीचे बहुत से ज़ख्म होते हैं ज़रा-सी आह के नीचे हमारे दिल की बातें दिल में ऐसे दब के रहती हैं कि जैसे पीर सोता हो कोई दरगाह के नीचे ✍️ चिराग़...

बिटिया

शादी का जोड़ा चढ़ा, सजे सोलहों साज इक छोटी-सी लाडली, बड़ी हुई है आज विदा समय बाबुल कहे, जोड़े दोनों हाथ मेरी लाज बंधी हुई, बिटिया तेरे साथ बिन कारण ताने सहे, बिन मतलब संत्रास पर उसने तोड़ा नहीं, बाबुल का विश्वास बाबुल तेरी देहरी, जब से छूटी हाय। तब से मन की बात बस, मन ही...
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