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गीत गढ़ने का हुनर

मसख़रों की मसख़री अपनी जगह शायरों की शायरी अपनी जगह गीत गढ़ने का हुनर कुछ और है मंच की बाज़ीगरी अपनी जगह ✍️ चिराग़...

दीपावली

जीवन बाती से जुड़े, पुरुषार्थों की आग। हर आंगन संदीप्त हो, जाय अंधेरा भाग ॥ दिव्य-दिव्य हों कल्पना, दिव्य-दिव्य हों रंग। दिव्य अल्पनाएँ बनें, हों सब दिव्य प्रसंग ॥ पावन पुष्पों से गुँथें, ऐसे बन्धनवार। जिन्हें लगाकर सज उठें, सबके तोरणद्वार ॥ भोर समीरों में घुलें, गेंदे...

व्यस्तता

जब तक तुम संग थीं मैंने नहीं तलाशी कोई ख़ुशी नहीं खोजी कोई मुस्कान नहीं ढूँढ़ी कोई हँसी …ज़रूरत ही नहीं पड़ी। अब तलाशता फिरता हूँ एक-मासूम सी ख़ुशी अपने दिल के लिये। एक कोमल-सी मुस्कान अपने होंठों के लिये। एक गीली-सी हँसी अपने चेहरे के लिये। और एक पावन-सी चमक अपनी...

शॉर्ट-सर्किट

सर्किट के सीने में हुई गड़बड़ का असर उपकरण पर भी समान रूप से पड़ा लेकिन इन दोनों के बीच बेचारा वायर अकारण ही सड़ा। तार बेचारा सदैव अपना कार्य सुचारू रूप से करता है लेकिन जब भी कुछ प्रॉब्लम होती है तो उसको जलना ही पड़ता है। रिश्तों के कनेक्शन में हुए झगड़ों के शॉर्ट-सर्किट...

बावरा कवि

हँसने के लिए कारणों का मोहताज नहीं, आँसुओं का ख़ूब अनुभवी हो गया हूँ मैं सारी दुनिया को आज अपना-सा लगता हूँ, अपनों के लिए अजनबी हो गया हूँ मैं झूठ-अनाचार-बेईमानी की बदलियों में, सच के रवि की कोई छवि हो गया हूँ मैं बावरेपने में घूमता हूँ दुनिया को भूल, तब लगता है एक कवि...

लोग आते-जाते हैं

दिल भी है इक ख़ूबसूरत से इदारे की तरह लोग आते-जाते हैं, पानी के धारे की तरह जब से ये संसार सारा हो गया है आसमां तब से है इन्सानियत टूटे सितारे की तरह चल सको तो तुम किसी के बन के उसके संग चलो वरना इक दिन छूट जाओगे सहारे की तरह दिल के रिश्तों को फ़रेबी उंगलियों से मत छुओ...
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