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कोई गीत नहीं लिखा

तुम रूठी तो मैंने रोकर, कोई गीत नहीं लिखा इस ग़म में दीवाना होकर, कोई गीत नहीं लिखा तुम जब तक थीं साथ तभी तक नज़्में-ग़ज़लें ख़ूब कहीं लेकिन साथ तुम्हारा खोकर कोई गीत नहीं लिखा प्यार भरे लम्हों की इक पल याद नहीं दिल से जाती मन भर-भर आता है फिर भी साँस नहीं रुकने पाती...
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