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दादाजी की राम-राम में बीत गई
बाबूजी की काम-धाम में बीत गई
हमें तेज़ रफ़्तार सुहाई शहरों की
फिर भी सारी उम्र जाम में बीत गई

✍️ चिराग़ जैन

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