+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

एक फ़कीर किसी गाँव में प्रवास कर रहे थे। प्रवास के दौरान उन्हें पता चला कि गाँव से कुछ दूर जंगली मनुष्यों की एक बस्ती है, जिन्होंने कभी रोटी नहीं खाई। वे आज भी कंद-मूल और जानवरों को खाकर जीवनयापन कर रहे हैं।
फ़क़ीर ने आठ-दस रोटियाँ बनवाकर अपने झोले में रखीं और उस बस्ती की ओर चल पड़े। एक भक्त ने टोका – ‘महाराज, वहाँ कम-से कम साठ-सत्तर जंगली रहते हैं। उनका इन आठ-दस रोटियों से कैसे पेट भरेगा?’
फ़क़ीर ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘मैं उनका पेट भरने नहीं जा रहा हूँ। मुझे बस उन्हें रोटी का स्वाद चखाना है, फिर पेट भरने का काम तो वो ख़ुद कर लेंगे।’

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!