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शिक़ायत करना मना है

दशकों तक परिश्रम करके तंत्र ने जनता को इतना सहनशील बनाया है कि लाख परेशानियाँ सहकर भी जनता शिक़ायत करने से परहेज करे। हम गाहे-बगाहे सत्ता और राजनीति को कोसते हैं। टेलिविज़न के सामने बैठकर राजनेताओं को भ्रष्ट कह लेते हैं; लेकिन हमारे सामने कुर्सी पर बैठा क्लर्क सामने खड़ी...

प्रेम : पावनता का द्वार

एक पहर ठहरी सखी, कान्हा जी के ठौर। पहुँची कोई और थी, लौटी कोई और।। योगेश छिब्बर जी का यह दोहा भारत में प्रेम के उत्कर्ष को समझने के लिये पर्याप्त हैं। भारत में प्रेम का चरम यह है कि मीरा ने जो प्रेमगीत रचे, वे भक्ति की मानक कविताएँ बनकर जग में प्रसिद्ध हुए। यह भारतीय...

प्यार समझना मुश्किल क्यों है

इस दुनिया में प्यार रहे तो भावों का सत्कार रहे तो कितना प्यारा होगा ये संसार समझना मुश्किल क्यों है प्यार समूचे जीवन का है सार; समझना मुश्किल क्यों है किस्सा सुनकर मन सबका कहता है इसमें भूल हुई है बिन मतलब की दुनियादारी पाँखुरियों में शूल हुई है जो रांझे के साथ हुई थी...
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