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स्मॉग

चाह पूनम की थी तो अमा दे गए
रौशनी से रहित चन्द्रमा दे गए
फॉग बनकर जिन्होंने बुलाया निकट
स्मॉग बनकर वही अस्थमा दे गए

✍️ चिराग़ जैन

कौरव

लड़ने को तो लड़ ही लूंगा, लेकिन ये डर लगता है
कौरव से लड़ते-लड़ते मैं ख़ुद कौरव ना हो जाऊँ

✍️ चिराग़ जैन

नोट बंद हो गये

जिनके इशारों पर नाचता था भ्रष्टतंत्र
कैश के बिना सभी रिमोट बंद हो गये
वोट फोर नोट की जो करते थे राजनीति
उन मायाधारियों के वोट बंद हो गये
डाकुओं का कैश से हुआ है ऐसा मोहभंग
सरे-आम लूट व खसोट बंद हो गये
पर्दे के पीछे काफ़ी कुछ अभी भी है बंद
जनता को लगता है नोट बंद हो गये

✍️ चिराग़ जैन

एक गीत मस्ती का

आकलन नहीं करना आप मेरी हस्ती का
कुछ अलग कलेवर है मेरे दिल की बस्ती का
एक ही ज़मीं पर मैं एक संग उगाता हूँ
एक गीत करुणा का, एक गीत मस्ती का

अश्क़ की कहानी भी शब्द में पिरोता हूँ
दर्द देखता हूँ तो ज़ार-ज़ार रोता हूँ
ख़ूब खिलखिलाता हूँ ग़लतियों पे मैं अपनी
व्यंग्य-बाण ख़ुद को मैं आप ही चुभोता हूँ
साज़िशें दिखें तो ये मन उदास होता है
लुत्फ़ भी उठाता हूँ साज़िशों की पस्ती का
एक गीत करुणा का, एक गीत मस्ती का

जिस क़लम से लिखता हूँ इक ग़्ाुलाब का खिलना
मैं उसी से कहता हूँ, तार-तार का छिलना
मंच पर चहकता हूँ, डायरी में रोता हूँ
आप जिस जगह चाहें मुझसे उस जगह मिलना
मानता हूँ लोहा भी चप्पुओं की हिम्मत का
गर्व भी है नौका की मौन सरपरस्ती का
एक गीत करुणा का, एक गीत मस्ती का

✍️ चिराग़ जैन

काँटों पर कटती हैं रातें

झलक नहीं मिलती इनके पैरों के छालों की
काँटों पर कटती हैं रातें हँसने वालों की

सब जैसी ही देह, जरा का डर इनका भी है
आयु बढ़े तो तन निश्चित जर्जर इनका भी है
भूख-तृषा की व्याधि इन्हें भी घेरे रहती है
ख़ुद से हैं बेहोश, पीर ही इनको सहती है
स्वार्थ गलाकर कुंजी गढ़ लीं ग़म के तालों की
काँटों पर कटती हैं रातें हँसने वालों की

घर-परिवार-समाज-ललक-आशा-हसरत-सपने
रिश्ते-नाते-मित्र-विरोधी-अनजाने-अपने
जन्म-मरण-अपनत्व-परायापन-संयोग-वियोग
अगिन ठहाके इन शब्दों की भट्ठी में तपने
फ़िक्र नहीं है अपने जीवन के भूचालों की
काँटों पर कटती हैं रातें हँसने वालों की

दर्द मिला; करुणा लिख डाली इसमें क्या है ख़ास
बात तभी, जब पीर पचाकर उपजा जाए हास
आँसू के गीतों से अंतर्मन धुल जाता है
किंतु हँसी से महके भीतर दिव्य पवित्र सुवास
टीस नहीं सुनती दुनिया मदिरा के प्यालों की
काँटों पर कटती हैं रातें हँसने वालों की

✍️ चिराग़ जैन

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