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होली

सबके जीवन में भरें पावनता के रंग ऐसी रंगत लाए अब, होरी अपने संग अब ऐसे मनने लगा, होली का त्यौहार चेहरे स्याह-सफेद हैं, रंगे हुए अख़बार भूले से भी मत करो, पॉवर का मिस-यूज़ भस्म हो गई होलिका, उड़ा पाप का फ्यूज़ ✍️ चिराग़...

लहर

ग़रीबों के बच्चों की भूखी आँखों में पलते कोरे स्वप्न अनायास ही मिट जाते हैं सागर-तट पर फैली रेत पर लिखे नाम की तरह। रेतीली चित्रकारी को मिटाने आयी लहर हर बार दे जाती है एक नया चित्र सागर के तट को ताकि व्यर्थ न हो यात्रा भविष्य में आनेवाली लहर की! ✍️ चिराग़...

मेहमानों का आना-जाना

वो, जिनके घर मेहमानों का आना-जाना होता है उनको घर का हर कमरा, हर रोज़ सजाना होता है जिस देहरी की किस्मत में स्वागत या वंदनवार न हो उस चौखट के भीतर केवल इक तहख़ाना होता है ✍️ चिराग़...

मूल से कटकर

एक दिन पीपल के पत्तों को हवा ने बरगलाया! फिर शरारत से भरे लहजे में उनका गात छूकर कान में यूँ फुसफुसाया- “तुमको अंदाज़ा नहीं क्या रूप है तुमको मिला इस नाकारा पेड़ की शोभा के तुम आधार तुम जो चाहो तो हवाएँ ले चलें तुमको दूर परियों के सुनहरे देस अम्बर पार! ये ख़नकती...

पत्थर को भी तरते देखा

हमने सूरज को यहाँ डूब के मरते देखा और जुगनू से अंधेरों को सँवरते देखा तूने जिस बात पे मुस्कान के पर्दे डाले हमने उसको तेरी आँखों में उतरते देखा एक लमहे में तेरे साथ कई रुत गुज़रीं तेरे जाने पे मगर वक़्त ठहरते देखा लोग कहते हैं बस इक शख़्स मरा है लेकिन क्या किसी ने वहाँ...
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