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इक अदद इन्सान

मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए हर...

मन

कितना भयंकर पल है …मन में कहने को बहुत कुछ है पर कुछ भी कहने का मन नहीं है। ✍️ चिराग़...

कोई यूँ ही नहीं चुभता

कोई चीखा है तो उसने बड़ी तड़पन सही होगी कोई यूँ ही नहीं चुभता कहीं टूटन रही होगी किसी को सिर्फ़ पत्थर-दिल समझ कर छोड़ने वालो टटोलो तो सही उस दिल में इक धड़कन रही होगी ✍️ चिराग़...

गुनाह

सज़ाओं में मैं रियायत का तलबदार नहीं क़ुसूरवार हूँ, कोई गुनाहगार नहीं मैं जानता हूँ कि मेरा क़ुसूर कितना है मुझे किसी के फ़ैसले का इन्तज़ार नहीं ✍️ चिराग़...

बनिये

बुझा दें प्यास औरों की वो मिट्टी के घड़े बनिये रहे अन्तस् में कोमलता भले बाहर कड़े बनिये हमारा क़द हमारी भावनाओं से निखरता है भले संख्या में कम हों हम मगर दिल के बड़े बनिये नहीं ऐसा नहीं हम लोग केवल दान करते हैं हक़ीक़त ये है हम प्रतिभाओं का सम्मान करते हैं हमें भगवान बनने...
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