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वर्तमान

मुझे बेबस दिलों में पल रहे अरमान लिखने हैं ग़रीबों के घरों के दर्द और तूफ़ान लिखने हैं कभी मौक़ा मिलेगा तो चमन की बात कर लूंगा अभी फुटपाथ के गलते हुए इन्सान लिखने हैं ✍️ चिराग़...

सियासत का ज़हर

सच के मंतर से सियासत का ज़हर काट दिया हाँ, ज़रा रास्ता मुश्क़िल था, मगर काट दिया वक्ते-रुख़सत तिरी ऑंखों की तरफ़ देखा था फिर तो बस तेरे तख़य्युल में सफ़र काट दिया फिर से कल रात मिरी मुफ़लिसी के ख़ंज़र ने मिरे बच्चों की तमन्नाओं का पर काट दिया सिर्फ़ शोपीस से कमरे को सजाने के लिए...
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