Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
जिनकी धमनियों में डोलता था ज्वालामुखी,
मात-भारती के क्रांति-कोष कहाँ खो गए
राष्ट्र-स्वाभिमान वाली मदिरा का पान कर
होते थे जो लोग मदहोश; कहाँ खो गए
जिस सिंह-गर्जना से बाजुएँ फड़कतीं थीं,
इन्क़लाब वाले जय-घोष कहाँ खो गए
देश को आज़ादी की अमोल सम्पदा थमा के,
नेताजी सुभाषचन्द बोस कहाँ खो गए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Poetry, Unpublished
बात यहीं से हो शुरू, और यहीं हो बन्द
जीवन को कुछ यूँ जियो, जैसे दोहा छन्द
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
अजब सी बात होती है मुहब्बत के तराने में
क़तल दर क़त्ल होते हैं सनम के मुस्कुराने में
मज़ा हमको भी आता है मज़ा उनको भी आता है
उन्हें नज़रें चुराने में हमें नज़रें मिलाने में
✍️ चिराग़ जैन