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व्यस्तता

जब तक तुम संग थीं मैंने नहीं तलाशी कोई ख़ुशी नहीं खोजी कोई मुस्कान नहीं ढूँढ़ी कोई हँसी …ज़रूरत ही नहीं पड़ी। अब तलाशता फिरता हूँ एक-मासूम सी ख़ुशी अपने दिल के लिये। एक कोमल-सी मुस्कान अपने होंठों के लिये। एक गीली-सी हँसी अपने चेहरे के लिये। और एक पावन-सी चमक अपनी...

कुछ तो होगी बात

रावण के व्यक्तित्व में, कुछ तो होगी बात जिसे मारने जन्म लें, तीन लोक के नाथ ✍️ चिराग़ जैन

नज़रिया

मुझे इन्सान चारों ओर नज़र आता है अक्स अपना ही तो हर ओर नज़र आता है ये दुनिया शायद आइनों की इक इमारत है तुझे हर शख्स यहाँ चोर नज़र आता है ✍️ चिराग़...

स्वीकार

बरसों से बरसते हैं अब क्या असर करेंगे बेबस ये बसेरे हैं कैसे बसर करेंगे रुकती है नज़र जाकर चूते हुए छप्पर पे छप्पर को भी गिरा दो खुलकर सबर करेंगे ✍️ चिराग़...

हुनर

तनहा-तनहा था सफ़र क्या कहिए आपका साथ मगर क्या कहिए मुझको मूरत में कर दिया तब्दील तेरे हाथों का हुनर क्या कहिए ✍️ चिराग़...
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