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मेहमानों का आना-जाना

वो, जिनके घर मेहमानों का आना-जाना होता है
उनको घर का हर कमरा, हर रोज़ सजाना होता है
जिस देहरी की किस्मत में स्वागत या वंदनवार न हो
उस चौखट के भीतर केवल इक तहख़ाना होता है

✍️ चिराग़ जैन

बनिये

बुझा दें प्यास औरों की वो मिट्टी के घड़े बनिये
रहे अन्तस् में कोमलता भले बाहर कड़े बनिये
हमारा क़द हमारी भावनाओं से निखरता है
भले संख्या में कम हों हम मगर दिल के बड़े बनिये

नहीं ऐसा नहीं हम लोग केवल दान करते हैं
हक़ीक़त ये है हम प्रतिभाओं का सम्मान करते हैं
हमें भगवान बनने की कोई ख्वाहिश नहीं लेकिन
वो हर सत्कर्म करते हैं जो बस इन्सान करते हैं

जो दुनिया को फतह कर ले, वो बल-उत्साह हममें है
सभी के घर जले चूल्हा, ये इक परवाह हममें है
जो इक हारे हुए राणा को अपनी सम्पदा दे कर
पुनः लड़ने की हिम्मत दे, वो भामाशाह हममें है

✍️ चिराग़ जैन

गीत लिखते वक़्त

इक दफ़ा पलकों को अश्क़ों में भिगो लेते हैं हम
और फिर अधरों पे इक मुस्कान बो लेते हैं हम
गीत गाते वक्त रुंध ना जाए स्वर इसके लिए
गीत लिखते वक्त ही जी भर के रो लेते हैं हम

✍️ चिराग़ जैन

अहिंसा

बारूदों के ढेर पर दुनिया खड़ी है देखो
ज़ख़्मों का एक ही इलाज है अहिंसा
धाँय-धाँय, धड़-धड़, धूम-धूम की ध्वनि में
वीणा के सुरों-सा एक साज है अहिंसा
तोप-टैंक-बम-परमाणुओं की कुण्डली में
साढ़ेसाती जैसी एक गाज है अहिंसा
ऐरों-गैरों-नत्थूखैरों-कायरों का काम नहीं
वीर-महावीरों की आवाज़ है अहिंसा
✍️ चिराग़ जैन

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