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सितारों की तरह

हो गई है ज़िन्दगी अपनी सितारों की तरह
देखते हैं लोग भी अब तो नज़ारों की तरह

जो चले थे काम करने कामगारों की तरह
वो उनींदे से खड़े हैं अब कतारों की तरह

सब शिकारी की तरह घर से निकलते हैं मगर
सब फँसे मिलते शिकंजे में शिकारों की तरह

आपके हालात की बेइंतहा मज़बूरियाँ
और मेरे दहकते अरमां अंगारों की तरह

हर ग़ज़ल मानी बदल लेती है मौक़ा देखकर
शेर हैं सब बेवफ़ाओं के इशारों की तरह

✍️ चिराग़ जैन

अहसास

तुम छोड़ जाओगे- ये अहसास खल रहा है
सीने में दर्द का इक लावा पिघल रहा है
कुछ इस तरह से हर इक लम्हा निकल रहा है
हाथों से जैसे कोई रेशम फिसल रहा है

✍️ चिराग़ जैन

गुमान के असर से बचा

चलो किसी तरह मैं मुश्क़िले-सफ़र से बचा
ख़ुदा मुझे तू अब गुमान के असर से बचा

इन आइनों के सामने से ज़रा बच के निकल
तू अपने आप को ख़ुद अपनी भी नज़र से बचा

अगर इस आग को बढ़ने से रोकना चाहे
तो अपने मुल्क़ को इस आग की ख़बर से बचा

ये दुनिया हर किसी पे उंगलियाँ उठाती है
तू अपनी सोच को रुसवाइयों के डर से बचा

बनावटें तिरे सच को भी झूठ कर देंगी
अगर वो सच है तो उसको अगर-मगर से बचा

दिलों की बात कहाँ, दुनिया की बिसात कहाँ
तू नज्मे-दिल को ज़माने की हर बहर से बचा

✍️ चिराग़ जैन

संतोष

सिर्फ़ मकरन्द बन के जी लेंगे
हम तेरी गन्ध बन के जी लेंगे
ज़िन्दगी चाक़ हो गई तो क्या
हम भी पैबन्द बन के जी लेंगे

✍️ चिराग़ जैन

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